बिलासपुर/घुमारवीं । कोरोना महामारी के चलते शिक्षण संस्थाओं के संचालन पर लंबे अरसे से लगाई रोक के बीच सोमवार को हिमाचल सरकार और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के निर्देश पर सोमवार को बिलासपुर के महाविद्यालयों में छठे समेस्टर की परीक्षाएं शुरू हो गईं। हालांकि, परीक्षा केंद्रों पर पहुंचने के लिए विद्यार्थियों को समय पर बसें नहीं मिलीं। इसके चलते कई परीक्षार्थियों को निजी टैक्सी का सहारा लेना पड़ा। जबकि, कुछेक लोग पैदल और लिफ्ट लेकर कॉलेज तक पहुंचे। वहीं पहले दिन की परीक्षा में बिलासपुर कॉलेज और घुमारवीं महाविद्यालय में पंजीकृत 1050 में से 1031 परीक्षार्थी शामिल हुए। इनमें से 19 लोगों ने परीक्षा नहीं दी।
दो सत्रों में आयोजित यूजी के छठे समेस्टर की परीक्षा में सुबह बिलासपुर कॉलेज में पंजीकृत 650 बच्चों ने परीक्षा दी। इनमें से सुबह के सेशन में 450 छात्रों ने परीक्षा दी। जबकि शाम के सेशन में 200 परीक्षार्थी शामिल हुए।
इनके अलावा परीक्षा में 17 छात्र अन्य कॉलेज के शामिल रहे। जोकि किन्हीं कारणों से अपने परीक्षा केंद्र न पहुंच पाने के कारण यहां पर परीक्षा में शामिल हुए थे। उधर, घुमारवीं महाविद्यालय में दोनों सेशन में हुए परीक्षा में पंजीकृत 400 में से 381 छात्रों ने परीक्षा दी। इनमें 19 छात्र किन्हीं कारणों से परीक्षा केंद्र पहुंच सके थे।
हालांकि इससे परीक्षा के आयोजन में कॉलेज एवं महाविद्यालय की ओर से कोविड के गाइड लाइनों का पालन करते हुए छात्रों को केंद्र पहुंचने पर सैनिटाइजर और फेस मास्क पहनकर प्रवेश कराया गया। इसके अलावा उनकी थर्मल स्क्त्रस्ीनिंग भी कराई गई। उधर, परीक्षा कक्ष से बाहर आए छात्रों ने कोरोना काल में परीक्षा कराए जाने पर रोष जताया। बताया कि कोविड के दौर में परीक्षा कराना उचित नहीं था। आलम यह था कि बस तक नहीं चल रहे थे। जिसके कारण निजी टैक्सी लेकर केंद्रों पर पहुंचना पड़ा।
कुछ बच्चे टैक्सी, लिफ्ट व कुछ घरों से पैदल चलकर और बाद में बस पकड़कर परीक्षा देने के लिए कॉलेज पहुंचे। वहीं कॉलेज प्रंबधन की तरफ से कोरोना काल में परीक्षा आयोजित करने को लेकर पुख्ता इंतजाम किए गए थे।
जबकि मलयावर का दिलीप कुमार बस सुविधा न होने के कारण 800 रुपये टैक्सी का किराया देकर परीक्षा देने आया था। कहा कि उसके गांव से जो समय समय पर बसें आती है वो भी कोरोना काल में बंद है। बस सुविधा उपलब्ध न होने के कारण मजबूरन टैक्सी का सहारा लिया गया।
विद्यार्थियों ने बयां किया दर्द
गेहड़वीं की शिवानी ने कहा कि वह बिलासपुर कॉलेज में परीक्षा देने के लिए अपनी निजी गाड़ी में आई। क्योंकि सुबह क्षेत्र से कोई भी बस सुविधा उपलब्ध नहीं थी और उसे 9 बजे तक परीक्ष हॉल में पहुंचना था।
मनीष कुमार 50 किलामीटर सफर कर मलोखर से परीक्षा देने के लिए बिलासपुर कॉलेज आया था। बस सुविधा न होने से उसे मजबूरन दो पहिया वाहन लेकर परीक्षा देने जाना पड़ा।
घुमारवीं की प्रगति भी करीब 30 किलोमीटर दूर से परीक्षा देने बिलासपुर कॉलेज पहुंची थी। बसों के अभाव में वो भी निजी वाहन से ही परीक्षा देने पहुंची थी।
समोह के अजय कुमार ने बताया कि उसका गांव कंटेनमेंट जोन में है। वह समोह से भगेउ़ तक किसी दूसरे व्यक्ति से लिफ्ट लेकर पहुंचा। वहां से बस लेकर परीक्षा देने बिलासपुर आया। जिसके लिए उसे परेशानी का सामना करना पड़ा।
मलयावर का दिलीप कुमार बस सुविधा न होने के कारण 800 रूपये टैक्सी का किराया देकर परीक्षा देने आया था। कहा कि उसके गांव से जो समय समय पर बसें आती है वो भी कोरोना काल में बंद है। बस सुविधा उपलब्ध न होने के कारण मजबूरन टैक्सी का सहारा लिया गया।