फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bilaspur News: प्राकृतिक खेती की मक्की की खरीद लक्ष्य से आधी, बारिश ने बिगाड़ा गणित

विज्ञापन
विज्ञापन
आतमा प्रोजेक्ट ने रखा था 100 क्विंटल खरीद का लक्ष्य
विज्ञापन

सिर्फ 42 किसानों से 49.5 क्विंटल ही मिल पाई मक्की

संवाद न्यूज एजेंसी
जुखाला (बिलासपुर)। जिले में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए आतमा प्रोजेक्ट की ओर से चलाए जा रहे मक्की खरीद अभियान को इस बार झटका लगा है। विभाग ने जिले में प्राकृतिक ढंग से उगाई गई 100 क्विंटल मक्की खरीदने का लक्ष्य रखा था, लेकिन सिर्फ लगभग आधा यानी 49.5 क्विंटल ही खरीदी जा सकी।
इस योजना के लिए प्राकृतिक खेती अपनाने वाले 100 किसानों ने पंजीकरण कराया था, लेकिन खराब मौसम और उत्पादन घटने के कारण केवल 42 किसान ही अपनी मक्की बेचने के लिए आगे आए। विभाग के अनुसार इस बार बरसात के मौसम में सामान्य से अधिक बारिश होने की वजह से मक्की की पैदावार काफी प्रभावित हुई। जिले में लगभग 8046 किसान प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। आतमा प्रोजेक्ट हर वर्ष इन किसानों से प्राकृतिक तरीके से उगाई गई मक्की खरीदता है ताकि इसका उपयोग आगे गुणवत्ता वाले उत्पाद बनाने में किया जा सके। इस वर्ष खरीद को सुचारु रूप से चलाने के लिए विभाग ने दो केंद्र स्थापित किए थे। स्वारघाट व सदर क्षेत्र के लिए निहाल में और झंडूता व घुमारवीं ब्लॉक के लिए पट्टा घुमारवीं में केंद्र खोला गया। इन दोनों केंद्रों पर किसानों से मक्की की खरीद 40 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से की गई। खरीद के बाद मक्की को लैब में भेजा जाएगा जहां इसकी शुद्ध प्राकृतिक गुणवत्ता की जांच की जाएगी। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद ही किसानों के खातों में भुगतान ट्रांसफर किया जाएगा। विभाग का कहना है कि यह प्रक्रिया पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए अपनाई जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

आतमा प्रोजेक्ट की ओर से खरीदी गई प्राकृतिक मक्की से राज्य सरकार के ब्रांड हिम भोग के तहत आटा तैयार किया जाएगा, जिसे उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाएगा। विभाग का मानना है कि इससे प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को बेहतर मूल्य और बाजार उपलब्ध होगा, वहीं उपभोक्ताओं को शुद्ध और प्राकृतिक उत्पाद मिलेंगे। आतमा प्रोजेक्ट के उपनिदेशक रितेश गुप्ता ने बताया कि इस बार लक्ष्य 100 क्विंटल रखा गया था, लेकिन लगातार बारिश से फसल उत्पादन काफी कम हुआ, जिससे खरीद पर भी असर पड़ा। कहा कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए विभाग आने वाले समय में किसानों को बेहतर प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन देने की योजना पर काम कर रहा है, ताकि भविष्य में उत्पादन और खरीद दोनों बढ़ाई जा सकें।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें