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Bilaspur News: जाहू-बिलासपुर, मार्कंडेय-शिमला रूट कई महीनों से ठप, हजारों लोग परेशान

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अभियान : बेबस जिंदगी-4
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- बंद रूटों ने सदर, श्री नयना देवी और अर्की विधानसभा क्षेत्रों के लोगों की बढ़ाई मुश्किलें
- बसों की कमी से आ रही परेशानी,निगम के पास नहीं समस्या का समाधान
गोपाल शर्मा
जुखाला(बिलासपुर)। जिले में हिमाचल पथ परिवहन निगम के बिलासपुर और सुंदरनगर डिपो के कई महत्वपूर्ण रूट लंबे समय से बंद पड़े हैं। नतीजा यह कि जिन रूटों पर कभी हजारों लोग रोजाना निर्भर रहते थे, अब वे महंगे और निजी वाहनों के सहारे यात्रा करने को मजबूर हैं। रूट बंद होने से प्रभावित लोगों में भारी रोष है।
सबसे ज्यादा प्रभावित रूटों में जाहू–बिलासपुर और मार्कंडेय-शिमला बस रूट शामिल हैं जिन पर अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है। जाहू-बिलासपुर रूट पर निगम की बस सेवा काफी समय से बंद है। इस रूट पर केवल निजी बसें चल रही हैं। इस बस में दिहाड़ी मजदूरी करने वाले लोग, कॉलेज के विद्यार्थी और कर्मचारी ज्यादा निर्भर थे। वहीं महिलाओं को भी 50 फीसदी किराया कटौती का लाभ मिलता था। निजी बसों में महिलाओं को पहले जहां 25 रुपये किराया था, अब 50 रुपये देना पड़ रहा है। सुबह-शाम बसों में भारी भीड़भाड़ के बीच यात्रा करनी पड़ रही है। छात्रों और बुजुर्गों को सीट तक नहीं मिलती। समयबद्धता न होने से यात्रियों की रोजाना दिनचर्या प्रभावित हो रही है। निगम की बस बंद होने से गरीब और छात्र वर्ग को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है।
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मार्कंडेय-शिमला बस सेवा पिछले लगभग एक वर्ष से बंद है। निगम का कहना है कि बसों की कमी के कारण इस रूट को रोका है। यह बस सुबह 5:45 बजे ऋषि मार्कंडेय मंदिर से चलती थी और नेरी, जनेड, सिकरोहा, मलोखर, नवगांव होते हुए शिमला पहुंचती थी। यह रूट सदर, श्री नयना देवी और अर्की विधानसभा क्षेत्रों के हजारों लोगों को शिमला से जोड़ता था। संवाद

इनसेट
किस-किस को हो रही है सबसे अधिक दिक्कत?
मार्कंडेय-शिमला बस रोजाना या हफ्ते में कई बार शिमला आने-जाने वाले नौकरीपेशा लोग, विश्वविद्यालय व कॉलेज के छात्रों के लिए यह बस बहुत सुलभ थी। आईजीएमसी अस्पताल शिमला जाने वाले मरीजों के लिए यह सबसे सुविधाजनक थी। ऋषि मार्कंडेय में दर्शन करने आने वाले श्रद्धालु भी लाभान्वित होते थे। रूट बंद होने पर लोगों को निजी टैक्सियों, किराये के वाहनों या बसें बदलकर यात्रा करनी पड़ रह है। इसमें समय और पैसा दोनों अधिक लग रहा है।

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कई बार लगाई अधिकारियों से गुहार, पर सुनवाई नहीं
सिकरोहा निवासी सेवानिवृत्त नायब तहसीलदार बालक राम शर्मा, कमलदेव, सिकरोहा पंचायत के प्रधान भूप चंद, उपप्रधान दुर्गा राम सहित कई लोगों ने बताया कि उन्होंने निगम और जनप्रतिनिधियों को कई बार ज्ञापन दिए। इसके बावजूद एक साल में भी रूट बहाल न होना जनता की उपेक्षा दर्शाता है। बार-बार ज्ञापन देने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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कोट
जाहू–बिलासपुर रूट पर निगम की बस बंद है लेकिन निजी बसें चल रही हैं। मार्कंडेय–शिमला रूट बसों की कमी के कारण अस्थायी रूप से बंद किया है। बसों की उपलब्धता बढ़ते ही रूटों की समीक्षा कर बहाली पर निर्णय लिया जाएगा।
विवेक लखनपाल, क्षेत्रीय प्रबंधक, एचआरटीसी बिलासपुर
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