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Bilaspur News: घुमारवीं-जाहू बस रूट में बदलाव से भड़का ग्रामीणों का गुस्सा

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पुराने रूट की बहाली की मांग, बिना सूचना बदला गया रूट
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विद्यार्थियों और कर्मचारियों पर सबसे ज्यादा असर
बेला मटयाल की बजाय केट बाह से चलने लगी बस

संवाद न्यूज एजेंसी

भगेड़ (बिलासपुर)। घुमारवीं से जाहू तक वाया बेला मटयाल चलने वाला एचआरटीसी का पुराना बस रूट इन दिनों बदलाव के चलते विवादों में आ गया है। वर्षों से क्षेत्र की जीवन रेखा मानी जाने वाली इस बस सेवा को अचानक वाया केट बाह करने से ग्रामीणों में रोष है। लोगों का कहना है कि बिना किसी पूर्व सूचना के किए गए इस बदलाव ने उनकी दिनचर्या को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है।
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ग्रामीणों के अनुसार यह बस लंबे समय से अपने पुराने रूट पर नियमित रूप से संचालित हो रही थी और विशेष रूप से ग्राम पंचायत पटेर और लंझता के लोगों के लिए यह मुख्य यातायात साधन थी। अब रूट बदलने के कारण इन क्षेत्रों के लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है, जिससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी हो रही है। सबसे ज्यादा परेशानी विद्यार्थियों, नौकरीपेशा लोगों और बुजुर्गों को उठानी पड़ रही है। विद्यार्थियों को समय पर स्कूल और कॉलेज पहुंचने में दिक्कत हो रही है, जबकि कर्मचारियों को रोजाना देरी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं बुजुर्गों और महिलाओं के लिए वैकल्पिक साधनों का अभाव स्थिति को और भी कठिन बना रहा है। इस मामले में ग्राम पंचायत के पूर्व प्रधान सुरेश कुमार ने कड़ी नाराजगी जताते हुए बताया कि बस रूट में बदलाव बिना किसी पूर्व सूचना के किया गया है, जो ग्रामीणों के साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को इस तरह के निर्णय लेने से पहले स्थानीय लोगों की सुविधा का ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने मांग की कि ग्राम पंचायत पटेर और लंझता के लोगों की सुविधा को देखते हुए बस सेवा को तुरंत पुराने रूट वाया बेला मटयाल पर बहाल किया जाए, ताकि लोगों को राहत मिल सके। ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से शीघ्र हस्तक्षेप की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे।
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