चोरी की लग्जरी गाड़ियों को फर्जी दस्तावेजों के सहारे वैध वाहन दिखाकर अलग-अलग राज्यों में बेचने वाले अंतरराज्यीय गिरोह की जांच में एक और अहम कड़ी सामने आई है। दिल्ली क्राइम ब्रांच ने फरीदाबाद से एजेंट राजेंद्र को गिरफ्तार किया है। जांच में आरोप है कि राजेंद्र बिलासपुर आरएलए से जुड़े मुख्य आरोपी गौरव के लिए एजेंट का काम करता था और चोरी की गाड़ियों के फर्जी रजिस्ट्रेशन से संबंधित काम उस तक पहुंचाता था।
दिल्ली क्राइम ब्रांच ने इस मामले में 9 जनवरी को एफआईआर दर्ज की थी। इसके बाद चोरी की लग्जरी गाड़ियों को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नई पहचान देकर बेचने वाले नेटवर्क की जांच शुरू की गई। जांच में सामने आया कि गिरोह चोरी की गाड़ियों को सीधे बेचने के बजाय पहले उनकी पहचान बदलने का काम करता था। इसके लिए गाड़ियों के चेसिस नंबर में हेरफेर किया जाता था। कुछ मामलों में पुरानी या पानी में डूबी गाड़ियों के चेसिस नंबर का इस्तेमाल चोरी की गाड़ियों पर किया जाता था।
इसके बाद गिरोह कथित तौर पर फर्जी सेल लेटर, फॉर्म-21, एनओसी, बैंक एनओसी और अन्य दस्तावेज तैयार करता था। इन कागजात के आधार पर चोरी की गाड़ियों को दूसरे राज्य के आरएलए में पंजीकृत करवाकर वैध वाहन के तौर पर दिखाने की कोशिश की जाती थी।