ग्राम पंचायत डंगार के प्रधान को पदच्युत करने संबंधी उपायुक्त बिलासपुर की अदालत के फैसले को मंडलायुक्त मंडी देवेश कुमार की अदालत ने निरस्त कर दिया है।
इसके साथ ही अदालत ने उपायुक्त को मामले का निपटारा नए सिरे से कानून के उचित प्रावधान के अंतर्गत दोनों पक्षों को सुनने के बाद करने के लिए उपायुक्त अदालत को वापिस भेजा है।
गौरतलब है कि उपायुक्त बिलासपुर की अदालत ने डंगार पंचायत प्रधान जगरनाथ शर्मा को 24 सितंबर 2015 को पदच्युत (सस्पेंड) करने के आदेश दिए थे।
इन आदेशों को जगरनाथ ने मंडलायुक्त मंडी की अदालत में दायर अपील के माध्यम से चुनौती दी थी। अपीलकर्ता जगरनाथ का यह तर्क था कि हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम की धारा 14 अ 1 के तहत उपायुक्त बिलासपुर की अदालत का उन्हें पदच्युत करने का फैसला सही नहीं है।
मंडलायुक्त मंडी देवेश कुमार की अदालत ने अपीलकर्ता जगरनाथ की अपील को स्वीकार करते हुए उपरोक्त आदेश दिए हैं। जानकारी के अनुसार डंगार पंचायत प्रधान जगरनाथ शर्मा को डीसी बिलासपुर की अदालत ने 24 सितंबर को पदच्युत करने के आदेश दिए थे।
प्रधान पर वित्तिय अनियमितताएं बरतने का आरोप था। इसमें पंचायत में एक सड़क के निर्माण पर हुए वास्तविक खर्च की तुलना में अधिक भुगतान करने का आरोप लगाया गया था।
प्रधान ने इस फैसले के खिलाफ डिविजनल कमिश्नर मंडी की अदालत में अपील की थी। उनका कहना था कि सड़क का निर्माण जेई और तकनीकी सहायक की देखरेख में हुआ था। उनकी पैमाइश और सचिव के अनुमोदन के आधार पर ही भुगतान किया जाता है। लेबर को पेमेंट चेक के माध्यम से की गई थी।