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या दिव्यांगों की चिकित्सीय देखभाल के लिए एमओयू साइन

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बिलासपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) बिलासपुर दिव्यांगजनों खासकर दृष्टिहीन लोगों की चिकित्सीय देखभाल के लिए भी सक्रिय रहेगा।
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एम्स बिलासपुर ने इस दिशा में पहल करते हुए उत्तराखंड की राजधानी अस्थायी देहरादून स्थित ऐतिहासिक राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तीकरण संस्थान के साथ इस बाबत आपसी सहमति के समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए है।
इसके तहत एम्स देहरादून के राष्ट्रीय संस्थान और उसके संयुक्त क्षेत्रीय केंद्र (सीआरसी) सुंदरनगर, मंडी के माध्यम से दिव्यांगजनों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार के प्रयास आगे बढ़ाएगा।
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प्रदेश में दिव्यांगजनों के कल्याण और उन्हें गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा देखभाल व पुनर्वास सेवाएं प्रदान करने के लिए आपसी सहयोग के साथ काम करने के लिए दोनों संस्थानों के बीच यह समझौता हुआ है।
एम्स बिलासपुर इस दिशा में सक्रियता से प्रयास आगे बढ़ाते संस्थान परिसर और संस्थान से बाहर प्रदेशभर में समय-समय पर शिविरों के माध्यम से दिव्यांगजनों को स्पेशलिस्ट और सुपर स्पेशलिस्ट चिकित्सा देखभाल सेवाएं प्रदान करेगा। राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तीकरण संस्थान देहरादून और सीआरसी सुंदरनगर दिव्यांगजनों के लिए पुनर्वास सेवाएं और सहायक उपकरण प्रदान करने में एम्स की मदद करेगा।
एमओयू की पुष्टि करते हुए एम्स बिलासपुर के कार्यकारी निदेशक डॉक्टर वीर सिंह नेगी ने बताया कि दोनों संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय के लिए ऑनलाइन सलाहकार सेवाएं भी स्थापित होंगी।
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दोनों संस्थान दिव्यांगजनों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार के लिए कम लागत वाले नवीन उपकरण और प्रौद्योगिकी को विकसित करने के लिए सहयोग व अनुसंधान की योजना भी बनाएंगे। इस सहयोग से दिव्यांगजनों के व्यापक स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं, पुनर्वास सेवाओं, स्वदेशी नवीन कम लागत वाले उपकरणों और प्रौद्योगिकी के विकास को बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने कहा कि इस सहयोग के माध्यम से न केवल हिमाचल प्रदेश राज्य बल्कि आसपास के राज्यों पंजाब, हरियाणा और उत्तराखंड के दिव्यांगजनों को भी लाभ मिलेगा।
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