ई-ऑफिस की ओवरऑल रैंकिंग में प्रदेश में पाया पहला स्थान, डीसी कार्यालय में 1,96,784 गतिविधियां दर्ज
सरकारी कामकाज को डिजिटल बनाने में प्रशासन ने प्रदेश में बनाई अलग पहचान
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। सरकारी कामकाज को डिजिटल बनाने की दिशा में बिलासपुर जिला प्रशासन ने प्रदेश में अपनी अलग पहचान बनाई है। उपायुक्त कार्यालय बिलासपुर ने ई-ऑफिस के प्रभावी और व्यापक इस्तेमाल में प्रदेश के सभी जिला उपायुक्त कार्यालयों को पीछे छोड़ते हुए पहला स्थान हासिल किया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार डीसी ऑफिस बिलासपुर में ई-ऑफिस के तहत कुल 1,96,784 गतिविधियां दर्ज की गई हैं। यह प्रदेश के किसी भी जिला उपायुक्त कार्यालय में दर्ज गतिविधियों में सर्वाधिक हैं।
ई-ऑफिस के आंकड़ों के मुताबिक बिलासपुर में इस अवधि के दौरान 148 ई-फाइलें बनाई गईं, जबकि 3,876 ई-फाइलों को मूव किया गया। इसी तरह 1,545 ई-रसीदें बनाई गईं और 1,91,215 ई-रसीदों को डिजिटल माध्यम से आगे भेजा गया। इन सभी गतिविधियों को मिलाकर कुल संख्या 1,96,784 पहुंची है। ओवरऑल रैंकिंग में बिलासपुर ने दूसरे स्थान पर रहे शिमला से भी बड़ी बढ़त बनाई है। डीसी ऑफिस शिमला में 1,17,984 गतिविधियां दर्ज की गईं और वह दूसरे स्थान पर रहा। 1,11,822 गतिविधियों के साथ मंडी तीसरे, 59,522 के साथ चंबा चौथे और 24,180 गतिविधियों के साथ हमीरपुर पांचवें स्थान पर रहा। इससे बिलासपुर और अन्य जिलों के बीच ई-ऑफिस इस्तेमाल में अंतर का अंदाजा लगाया जा सकता है। फाइलों की जगह अब डिजिटल माध्यम से हो रहा कामई-ऑफिस व्यवस्था लागू होने से सरकारी कार्यालयों में फाइलों और पत्राचार को एक अधिकारी से दूसरे अधिकारी तक पहुंचाने की प्रक्रिया डिजिटल हो गई है। इससे कागजी फाइलों पर निर्भरता कम करने के साथ-साथ फाइलों की आवाजाही और उनके निस्तारण की निगरानी करना आसान होता है। इसके किस स्तर पर फाइल लंबित है और उसे आगे कब भेजा गया, इसकी जानकारी भी डिजिटल रिकॉर्ड के माध्यम से उपलब्ध रहती है। बिलासपुर कार्यालय में दर्ज कुल गतिविधियों में सबसे बड़ा हिस्सा ई-रसीदों की आवाजाही का है। 1.91 लाख से अधिक ई-रसीदें मूव की गईं। इससे पता चलता है कि कार्यालयी पत्राचार और प्राप्त दस्तावेजों को डिजिटल माध्यम से संबंधित शाखाओं और अधिकारियों तक पहुंचाने की प्रक्रिया का व्यापक स्तर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। ई-ऑफिस व्यवस्था का उद्देश्य सरकारी कार्यालयों में कामकाज को अधिक तेज, पारदर्शी और व्यवस्थित बनाना है। डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहने से फाइलों और पत्रों की निगरानी आसान होती है और कार्यालयी कार्यों के समयबद्ध निस्तारण में मदद मिलती है। साथ ही कागजी प्रक्रिया में लगने वाले समय और संसाधनों को भी कम किया जा सकता है।
कोट
जिला प्रशासन की ओर से कार्यालयी कामकाज में ई-ऑफिस के प्रभावी इस्तेमाल पर लगातार जोर दिया जा रहा है। प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त करना डिजिटल कार्यप्रणाली को अपनाने और कार्यालयी प्रक्रियाओं को अधिक दक्ष एवं पारदर्शी बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों का परिणाम है। प्रशासन का प्रयास है कि अधिक से अधिक सरकारी कार्य डिजिटल माध्यम से संचालित हों और लोगों को सेवाएं समयबद्ध तरीके से उपलब्ध करवाई जा सकें।
-राहुल कुमार, उपायुक्त,बिलासपुर