पांच पंचायतों को स्वर्ण, 11 को रजत और 46 को मिला कांस्य प्रमाणपत्र
तीन साल तक उपलब्धि बरकरार रखने वाली पंचायतों किया सम्मानित
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत जिला बिलासपुर ने टीबी मुक्त अभियान में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। जिले की 62 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया गया है। इनमें लगातार तीन वर्षों तक टीबी मुक्त स्थिति बनाए रखने वाली पांच पंचायतों को स्वर्ण, 11 पंचायतों को रजत और 46 पंचायतों को कांस्य प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। बचत भवन में आयोजित जिला स्तरीय सम्मान समारोह में उपायुक्त राहुल कुमार ने टीबी मुक्त घोषित ग्राम पंचायतों के पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशस्ति पत्र और महात्मा गांधी की प्रतिमा भेंट कर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों, स्वास्थ्य विभाग, आशा कार्यकर्ताओं, निक्षय मित्रों और आमजन के संयुक्त प्रयासों से टीबी उन्मूलन अभियान जनआंदोलन का रूप ले रहा है। उन्होंने कहा कि टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग लगातार समन्वय के साथ कार्य कर रहे हैं। जिले में टीबी की जल्द पहचान और उपचार के लिए आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीन की मदद से दूरदराज क्षेत्रों में भी संदिग्ध मरीजों की जांच संभव हो रही है, जिससे समय पर उपचार शुरू करने में मदद मिल रही है। उपायुक्त ने बताया कि जिले में टीबी मरीजों की जांच के लिए 18 टीबी डायग्नोस्टिक सेंटर संचालित किए जा रहे हैं। नागरिक अस्पताल घुमारवीं, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मार्कंड, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र झंडूता, क्षेत्रीय अस्पताल बिलासपुर, एम्स बिलासपुर और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्वारघाट में एनएएटी जांच सुविधा उपलब्ध है।
उन्होंने बताया कि टीबी मुक्त ग्राम पंचायतों का चयन छह निर्धारित मानकों के आधार पर किया जाता है। लगातार तीन वर्षों तक टीबी मुक्त स्थिति बनाए रखने वाली पंचायतों को स्वर्ण, दो वर्षों तक उपलब्धि कायम रखने वाली पंचायतों को रजत और पहली बार टीबी मुक्त बनने वाली पंचायतों को कांस्य प्रमाणपत्र दिया जाता है। वर्ष 2025 में जिले की 66 पंचायतों ने टीबी मुक्त प्रमाणन के लिए दावा प्रस्तुत किया था। इनमें 46 पंचायतों को कांस्य, 11 पंचायतों को रजत और पांच पंचायतों को पहली बार स्वर्ण प्रमाणपत्र मिला।
उपायुक्त ने आमजन, सामाजिक संस्थाओं और औद्योगिक प्रतिष्ठानों से टीबी मुक्त भारत अभियान-सहयोग कोष में योगदान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि क्षय रोगियों के पोषण सहयोग के लिए समाज की भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है। सम्मान समारोह में अतिरिक्त उपायुक्त रुपिंदर कौर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. शशि दत्त शर्मा, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, पंचायत प्रतिनिधि, आशा कार्यकर्ता, निक्षय मित्र और विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
इन पंचायतों को मिला स्वर्ण प्रमाणपत्र सम्मान
गटवाड़, लंजता, रोड जामन, तरसूह और टोबा संगवाणा ग्राम पंचायतों को स्वर्ण प्रमाणपत्र प्रदान किया गया।
रजत श्रेणी में ये पंचायतें रहीं शामिल
कसारू, कोट, संडयार, गालियां, जांगला, झबोला, नघियार, विजयपुर, द्रोबड़, कचौली और माकड़ी पंचायतों को रजत प्रमाणपत्र मिला।
कांस्य प्रमाणपत्र पाने वाली पंचायतें
घुमारवीं विकास खंड की बाड़ी, बरोटा, गाहर, हवाण, पटेर, पट्टा, तल्याणा, बकरोआ और छत सहित झंडूता, सदर बिलासपुर और श्री नयना देवी जी विकास खंड की कुल 46 पंचायतों को कांस्य प्रमाणपत्र प्रदान किया गया।