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Bilaspur News: चिट्टा तस्करी मामले में बिहार का युवक दोषी करार

Fri, 08 May 2026 11:46 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
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अदालत से
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लॉकडाउन के दौरान स्वारघाट पुलिस ने दबोचा था आरोपी
विशेष न्यायाधीश ज्योत्सना सुमंत डढवाल की अदालत ने सुनाया फैसला
-194.68 ग्राम हेरोइन के साथ पकड़े जाने के मामले में पाया गया था संलिप्त

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। विशेष न्यायाधीश बिलासपुर ज्योत्सना सुमंत डढवाल की अदालत ने करीब छह साल पुराने चिट्टा तस्करी के एक मामले में आरोपी को दोषी करार दिया है। अदालत ने बिहार के बेगूसराय जिले के थाना चकिया बरौनी, गांव अमरपुर निवासी रणधीर कुमार को 194.68 ग्राम हेरोइन (चिट्टा) के साथ पकड़े जाने के मामले में संलिप्त पाया है। शुक्रवार को अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए आरोपी को तुरंत हिरासत में लेने के आदेश जारी किए।
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मामला 10 जून 2020 का है, जब देश में कोरोना महामारी के चलते लॉकडाउन लागू था। उस दौरान मुख्य आरक्षी सुरेंद्र कुमार की अगुवाई में पुलिस टीम नेशनल हाईवे-205 पर नलियां के पास आशु ढाबा के पास गश्त और नाकाबंदी पर थी। सुबह करीब 9:30 बजे पुलिस ने एक ट्रक को चेकिंग के लिए रोका। इसी बीच पुलाचड़ की ओर से एक युवक पैदल आता हुआ दिखाई दिया। पुलिस को सामने देख युवक घबरा गया और पीछे मुड़कर भागने लगा। पुलिस टीम ने जब उसका पीछा किया तो वह सड़क किनारे गिर गया, जिससे उसके हाथ में पकड़ा नीला कैरी बैग भी जमीन पर गिर गया। संदेह होने पर पुलिस ने ट्रक चालक जसविंदर सिंह को स्वतंत्र गवाह के तौर पर मौके पर बुलाया और आरोपी के बैग की तलाशी ली। बैग के अंदर से जियोनी स्मार्टफोन का एक डिब्बा बरामद हुआ, जो भूरे रंग की सेलो टेप से पूरी तरह लिपटा हुआ था। जब डिब्बे को खोला गया तो उसके भीतर एक पारदर्शी पॉली पैक में 194.68 ग्राम पीला पाउडर बरामद हुआ। मौके पर ही ड्रग किट से जांच करने पर इसकी पुष्टि हेरोइन (चिट्टा) के रूप में हुई। मुकदमे के दौरान लोक अभियोजक सी एस भाटिया ने अदालत में 14 गवाह पेश किए। बचाव पक्ष ने दलील दी थी कि आरोपी एक प्रवासी मजदूर है और उसे रंजिशन फंसाया गया है, लेकिन अदालत ने इन तर्कों को खारिज कर दिया। विशेष न्यायाधीश ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि स्वतंत्र गवाहों के बयान और एसएफएल जुंगा की रिपोर्ट से यह पूरी तरह साबित होता है कि आरोपी के कब्जे से नशीला पदार्थ बरामद हुआ था। अदालत ने यह भी माना कि लॉकडाउन के दौरान आरोपी का पुलिस को देखकर भागना उसके अपराध बोध को दर्शाता है। अदालत ने लिंक एविडेंस और कानूनी प्रक्रियाओं (धारा 52-ए) को भी सही पाया। फैसले के बाद पुलिस ने दोषी को हिरासत में ले लिया है और सजा की अवधि पर सुनवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
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