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Bilaspur News: बैरिकेड्स और 19 वर्षीय चालक ने छीनी दो जिंदगियां

Fri, 16 Jan 2026 11:31 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
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कीरतपुर–मनाली फोरलेन पर बलोह के समीप लगाए बैरीकेट, जहां पर हादसा हुआ। संवाद
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कम उम्र के चालक को हैवी लाइसेंस देने पर उठे सवाल
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फोरलेन पर बैरिकेड्स के बावजूद नहीं हुए दस्तावेज चेक
फोरलेन हादसे ने पुलिस व परिवहन व्यवस्था पर खड़े किए गंभीर सवाल

संजीव शामा
घुमारवीं(बिलासपुर)। कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर बलोह के समीप हुए दर्दनाक सड़क हादसे में गर्भवती महिला लतिका शर्मा और उसके गर्भ में पल रहे आठ माह के शिशु की मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। यह हादसा अब सिर्फ एक सड़क दुर्घटना नहीं रहा, बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली, परिवहन विभाग की निगरानी और सड़क सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर करता मामला बन गया है। बड़ी बात यह है कि कैंटर चालक की उम्र मात्र 19 साल है।

हादसे को लेकर सबसे बड़ा सवाल दुर्घटना स्थल पर लगाए गए बैरिकेड्स को लेकर उठ रहा है। स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि जिस स्थान पर यह हादसा हुआ, वहां पुलिस द्वारा बैरिकेड्स लगाए गए थे, जबकि न तो कोई सक्रिय नाका लगाया गया था और न ही वाहनों की नियमित जांच की जा रही थी। यदि सड़क पर अचानक बैरिकेड्स न लगाए गए होते तो संभव है कि वाहन का संतुलन न बिगड़ता और यह भयावह हादसा टल सकता था। नियमों के अनुसार, बैरिकेड्स का प्रयोग केवल वाहन जांच या नाके के दौरान ही किया जाना चाहिए, अन्यथा सड़क को अवरुद्ध करना दुर्घटनाओं को न्योता देने जैसा है। इस हादसे का दूसरा गंभीर पहलू कैंटर चालक की उम्र से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, दुर्घटना के समय भारी व्यावसायिक वाहन चला रहा चालक मात्र 19 वर्ष का बताया जा रहा है। ऐसे में यह सवाल स्वाभाविक है कि इतनी कम उम्र में उसे भारी वाहन चलाने का लाइसेंस कैसे जारी किया गया। यदि चालक के पास वैध लाइसेंस नहीं था, तो फिर वह राजस्थान से हिमाचल प्रदेश तक भारी वाहन लेकर कैसे पहुंच गया? रास्ते में कहीं भी उसकी जांच न होना पुलिस और परिवहन विभाग की निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि बैरिकेड्स लगाए गए थे, तो उनका उद्देश्य वाहनों को रोककर जांच करना होना चाहिए था। ऐसे में यह समझ से परे है कि चालक को क्यों नहीं रोका गया और उसके दस्तावेजों की जांच क्यों नहीं की गई। यह स्थिति सड़क सुरक्षा के नाम पर की जा रही औपचारिकताओं की पोल खोलती है। हादसे में लतिका शर्मा और उनके गर्भस्थ शिशु की मौत से एक पूरा परिवार उजड़ गया। लतिका अपने पीछे आठ साल के बेटे को छोड़ गई हैं, जो अब मां की ममता से वंचित हो गया है। क्षेत्र में इस घटना के बाद शोक और आक्रोश का माहौल है। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की मांग की है। लोगों का कहना है कि बैरिकेड्स लगाने की प्रक्रिया, चालक की वैधता, लाइसेंस जारी करने की जिम्मेदारी और रास्ते में हुई जांच की लापरवाही इन सभी बिंदुओं पर स्पष्ट जवाब सामने आने चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासद घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। यह हादसा प्रशासन के लिए चेतावनी है कि सड़क सुरक्षा केवल कागजों और औपचारिकताओं से नहीं, बल्कि जिम्मेदार और सतर्क व्यवस्था से सुनिश्चित होती है। संवाद
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