खैरियां स्कूल में तसले में पत्थर ढोते हुए बच्चा।
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शहर से सटे खैरियां प्राइमरी स्कूल में नन्हें मुन्ने बच्चों से मजदूरी करवाई जा रही है। हैरानी इस बात की है कि अध्यापकों के सामने बच्चों से बड़े-बड़े पत्थरों की ढुलाई करवाई जा रही है जबकि स्कूल परिसर को पक्का करने में लगे श्रमिक आराम फरमा रहे हैं। जहां शिक्षा विभाग सरकारी स्कूलों में बच्चों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के दावे किए जा रहे हैं, वहीं स्कूलों में बच्चों से मजदूरों की तरह काम करवाया जा रहा है।
बच्चों के हाथों में किताबों की जगह पत्थरों से भरे तसले थमाए जा रहे हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकारी स्कूलों में किस तरह की शिक्षा बच्चों की दी जा रही है। मामला शुक्रवार दोपहर करीब एक बजे का है, जब खैरियां स्कूल में नन्हें-नन्हें बच्चों से पत्थर ढुलवाए जा रहे थे। बच्चे पत्थरों से भरे तसलों को अपने सिर पर उठाकर ला रहे थे। इस दौरान बाकायदा अध्यापक उन्हें दिशा-निर्देश भी दे रहे थे। यही नहीं बच्चे स्कूल के साथ नाले से बड़े-बड़े पत्थर उठाकर ला रहे थे। जबकि काम पर लगे मजदूर आराम फरमा रहे थे। बच्चों के चेहरे पर बह रहा पसीना उनकी मजबूरी को साफ बयां कर रहा था।
इन दिनों स्कूल के परिसर को पक्का करने का कार्य चला हुआ है। इसके लिए ठेकेदार को कार्य आवंटित किया गया है। मगर यहां मजदूरों से काम लेने की जगह स्कूली बच्चों से काम करवाया जा रहा है। सरकारी स्कूल में बरती जा रही इस कोताही से शिक्षा विभाग पर सवालिया निशान खड़ा हो गया है।
वहीं, बच्चों के अभिभावकों ने भी इसकी कड़ी आलोचना की है। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों को स्कूल में शिक्षा ग्रहण करने के लिए भेजा जाता है, न कि पत्थर ढोने के लिए। उन्होंने शिक्षा विभाग से इस मामले पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। उधर, इस बारे में स्कूल अध्यापकों का कहना था कि लंच ब्रेक में बच्चों से मदद ली जा रही थी।
इसमें कोई बड़ी बात नहीं है। जिला के सभी सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने के लिए शिक्षा उपनिदेशक (प्रारंभिक) बिलासपुर द्वारा स्कूलों के औचक निरीक्षण किए जा रहे हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी स्कूलों पर पूरी नजर रखी जा रही है।
मगर शहर के साथ सटे स्कूल में बच्चों से मजदूरों की तरह करवाए जा रहे कार्य ने व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है। मामले को लेकर शिक्षा उपनिदेशक (प्रांरभिक) पीसी वर्मा ने कहा कि बच्चों से पत्थर ढुलवाना सरासर गलत है। यदि खैरियां स्कूल में ऐसा हो रहा है, तो स्कूल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। बच्चों की शिक्षा से किसी तरह का खिलवाड़ सहन नहीं होगा।