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Bilaspur News: खराब सड़क से स्कूली बच्चों, ग्रामीणों को परेशानी, धार्मिक स्थल के विकास की भी मांग

Sun, 22 Feb 2026 11:40 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
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ग्राम पंचायत छकोह स्थित जियुणी बावड़ी। संवाद
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ग्राउंड रिपोर्ट
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-हरड़ी कोठी लिंक रोड बदहाल, प्राचीन बावड़ी व सिद्ध बाबा की तपोस्थली तक पहुंच मुश्किल
-जियुणी बावड़ी के चमत्कारी जल की है मान्यता, हरड़ की परंपरा और नए मंदिर निर्माण से बढ़ी है पहचान

संवाद न्यूज एजेंसी
मलोखर(बिलासपुर)। ग्राम पंचायत छकोह के तहत हरड़ी कोठी गांव से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला छकोह तक जाने वाली लिंक रोड की हालत खस्ता है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की दुर्दशा के कारण स्कूली बच्चों को रोजाना परेशानी झेलनी पड़ रही है। बरसात के दिनों में स्थिति और भी खराब हो जाती है। लोगों ने प्रशासन से सड़क के शीघ्र सुधार की मांग उठाई है।
ग्रामीणों का कहना है कि इसी मार्ग से गांव में स्थित प्राचीन धार्मिक स्थल जियुणी बावड़ी, सिद्ध बाबा की तपोस्थली और कठपौल धार स्थित समाधि तक पहुंच भी प्रभावित होती है, जबकि यह स्थान क्षेत्र की आस्था का प्रमुख केंद्र है और यहां श्रद्धालु लगातार आते रहते हैं। बताया जाता है कि प्राचीन समय में शिमला जाने का पैदल मार्ग इसी क्षेत्र से होकर गुजरता था। उस दौरान यात्री कई दिनों तक यहां रुककर विश्राम करते थे। गांव की बुजुर्ग महिलाओं कलावती देवी (96), कृष्णा देवी (85), शांति देवी (90), जानकी देवी (102) और महंती देवी (85) के अनुसार राजाओं के समय यह मुख्य पैदल रास्ता था। एक बार चारपाई पर लाए जा रहे बीमार व्यक्ति ने यहां बावड़ी का पानी पीया और उसके बाद उसने स्वयं चलना शुरू कर दिया और स्वस्थ होकर अपने घर की ओर रवाना हो गया। तभी से इस बावड़ी का नाम जियुणी पड़ गया। ग्रामीणों के अनुसार यह स्थान पहले सिद्ध बाबा का तपोस्थल था। गांव निवासी हीरु राम शर्मा ने बताया कि वह जब गाय के लिए घास लेने जाते थे तो बाबा के उपदेश भी सुनते थे। लोगों का मानना है कि बाबा कोई महान सिद्ध पुरुष थे और उनके विचार अत्यंत अलौकिक थे। आज भी क्षेत्र से गुजरने वाली देवी-देवताओं की पालकियां यहां खुद रुककर इस स्थान को नमन करती हैं। बाबा के पास गंगा, जमुना और सरस्वती नाम की तीन गायें, बुद्धू नाम का बैल, डब्बा नाम का बकरा, शेरा और हीरा नाम के कुत्ते थे। बुजुर्गों का कहना है कि बाबा जब भी यात्रा पर जाते थे तो ये सभी पशु उनके साथ चलते थे और कई बार पैदल चारधाम यात्रा भी की। ग्रामीण बताते हैं कि इस स्थल पर पहले बरगद, आम और पीपल के विशाल प्राचीन वृक्ष थे। एक हादसे के दौरान पीपल का पेड़ गिर गया था। सड़क निर्माण के समय यहां मौजूद कुछ प्राचीन मूर्तियां भी मलबे में दब गई थीं।
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इनसेट
मंदिर निर्माण और गोशाला की योजना
श्रद्धालुओं और ग्रामीणों के सहयोग से यहां बाबा महाकाल, पंचमुखी हनुमान और गुरु दत्तात्रेय मंदिर का निर्माण किया गया है, जबकि भगवान विष्णु के प्रथम अवतार मत्स्य भगवान के मंदिर का निर्माण कार्य प्रगति पर है। मंदिर परिसर से सटे खेत को गांव की कलावती देवी ने गोवंश सेवा के लिए दान दिया है, जहां ग्रामीण गाोशाला निर्माण की योजना बना रहे हैं।
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इनसेट
हरड़ की परंपरा से प्रसिद्ध हरड़ी कोठी
हरड़ी कोठी गांव आयुर्वेदिक पौधे हरड़ के लिए भी प्रसिद्ध है, जिसका उल्लेख विष्णु पुराण में मिलता है। गांव में हरड़ का पहला पेड़ सिद्ध बूटी के नाम से जाना जाता है और उसके पास प्राचीन धूणा भी स्थित है। परंपरा के अनुसार आज भी हरड़ के फल तोड़ने से पहले कन्या पूजन और पूजा की जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि यहां की भूमि हरड़ की खेती के लिए अत्यंत उपजाऊ रही है और प्राचीन समय से इसकी खेती होती आई है। हरड़ी कोठी गांव निचली हरड़ी कोठी और ऊपरी हरड़ी कोठी दो भागों में विभाजित है। ग्रामीणों का मानना है कि यदि सड़क सुधारी जाए और इस ऐतिहासिक धार्मिक स्थल का संरक्षण व विकास किया जाए तो यह क्षेत्र धार्मिक पर्यटन के रूप में भी पहचान बना सकता है।

ग्राम पंचायत छकोह स्थित जियुणी बावड़ी। संवाद

ग्राम पंचायत छकोह स्थित जियुणी बावड़ी। संवाद

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