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Bilaspur News: अतिरिक्त साक्ष्य पेश करने की अर्जी खारिज, अपीलकर्ताओं को झटका

Fri, 10 Apr 2026 11:40 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
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अदालत से
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1979 के आदेश को रिकॉर्ड में लाने की मांग ठुकराई
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश बिलासपुर की अदालत ने दिया आदेश
कहा-पर्याप्त अवसर के बावजूद नहीं दिखाया दस्तावेज,अब नहीं मिलेगी राहत

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश बिलासपुर की अदालत ने एक मामले में अपीलकर्ताओं की ओर से दायर अतिरिक्त साक्ष्य पेश करने की अर्जी को खारिज कर दिया। अदालत ने अपने विस्तृत आदेश में कहा कि आवेदन में कोई ठोस आधार नहीं है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।
मामले में अपीलकर्ताओं ने सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 41 नियम 27 के तहत आवेदन दायर कर 31 मई 1979 को सहायक कलक्टर द्वितीय श्रेणी, सदर बिलासपुर की ओर से पारित आदेश की प्रति को अतिरिक्त साक्ष्य के रूप में रिकॉर्ड पर लाने की अनुमति मांगी थी। आवेदन में कहा गया कि संबंधित दस्तावेज पहले से ही अदालत की फाइल में मौजूद है और मूल वाद दायर करते समय ही इसे प्रस्तुत किया गया था, लेकिन ट्रायल के दौरान अदालत के कार्यभार के चलते इसे प्रदर्शित नहीं किया जा सका। अपीलकर्ताओं का तर्क था कि यह दस्तावेज अपील के निपटारे के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और इससे मामले से जुड़े विवादों पर स्पष्टता आएगी। उन्होंने अदालत से न्याय हित में इस दस्तावेज को रिकॉर्ड में लेने की अनुमति देने की मांग की। वहीं, प्रतिवादियों ने इस आवेदन का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि अपीलकर्ताओं ने अपने मूल वाद में ही इस आदेश के अधिकार क्षेत्र को चुनौती दी थी और अब उसी दस्तावेज को साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत करने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने यह भी दलील दी कि 31 मई 1979 का उक्त आदेश बाद की अपीलों में निरस्त हो चुका है और उच्च न्यायालय ने वर्ष 2008 में मामले का अंतिम निपटारा किया था। प्रतिवादियों ने अदालत को यह भी बताया कि यह मुकदमा वर्ष 2008 से लंबित है और अपीलकर्ताओं को 2013 से 2015 के बीच पर्याप्त अवसर मिला था कि वे अपने साक्ष्य पेश करें, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। ऐसे में अब अंतिम बहस के समय यह आवेदन दायर करना केवल मामले को लंबा खींचने की रणनीति है।
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अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों, आवेदन और रिकॉर्ड पर मौजूद दस्तावेजों का गहन अध्ययन करने के बाद स्पष्ट किया कि आदेश 41 नियम 27 का उद्देश्य केवल उन्हीं परिस्थितियों में अतिरिक्त साक्ष्य की अनुमति देना है, जब अदालत को न्यायपूर्ण निर्णय देने के लिए उसकी आवश्यकता हो या कोई ठोस कारण मौजूद हो। यह प्रावधान किसी पक्ष को अपनी कमजोरियों को दूर करने या लापरवाही को सुधारने का अवसर देने के लिए नहीं है।
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अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अपीलकर्ताओं द्वारा दिया गया यह तर्क कि दस्तावेज अदालत के कार्यभार के कारण प्रदर्शित नहीं हो पाया, कानूनन स्वीकार्य आधार नहीं है। साथ ही यह भी पाया गया कि अपीलकर्ताओं के पास पर्याप्त अवसर होने के बावजूद उन्होंने समय रहते दस्तावेज को साक्ष्य के रूप में पेश नहीं किया। अदालत ने यह भी माना कि जिस आदेश को रिकॉर्ड में लाने की मांग की जा रही है, वह पहले ही निरस्त किया जा चुका है और उसका कोई साक्ष्य मूल्य नहीं बचता। ऐसे में उसे अतिरिक्त साक्ष्य के रूप में स्वीकार करने का कोई औचित्य नहीं बनता। इन सभी तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने आवेदन को निराधार और मेरिट से रहित बताते हुए खारिज कर दिया। साथ ही निर्देश दिए कि इस आवेदन को औपचारिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद मुख्य केस फाइल के साथ संलग्न किया जाए।
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