अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश बिलासपुर की अदालत ने राहत देने से किया इन्कार
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश बिलासपुर की अदालत ने घुमारवीं थाना में दर्ज एनडीपीएस एक्ट के मामले में आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि व्यावसायिक मात्रा में चरस बरामदगी से जुड़े इस मामले में आरोपी के खिलाफ प्रथम दृष्टया वित्तीय लेन-देन, कॉल डिटेल और साजिश से जुड़े तथ्य सामने आए हैं। जांच के लिए आरोपी से हिरासत में पूछताछ जरूरी है। पुलिस ने अदालत को बताया कि 11 अगस्त 2025 को घुमारवीं थाना पुलिस ने नाके के दौरान एक कार को जांच के लिए रोका था। वाहन में सवार आरोपी के कब्जे से चरस बरामद हुई थी, जो जांच में व्यावसायिक मात्रा की पाई गई। जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को तस्करी में अन्य लोगों की भूमिका से जुड़े साक्ष्य मिले। पुलिस के अनुसार आरोपी के बैंक खाते और मोबाइल नंबर से हुए जी-पे लेन-देन की जानकारी मिली है। इसके अलावा कॉल डिटेल रिकॉर्ड, मोबाइल कनेक्टिविटी और वाहन से जुड़े दस्तावेज भी जांच का हिस्सा हैं। पुलिस ने दावा किया कि इन साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है। पुलिस ने यह भी बताया कि आरोपी जांच में शामिल नहीं हुआ और उसकी तलाश में कई जगह दबिश दी गई। इसके बाद गिरफ्तारी वारंट जारी किए गए और उसे उद्घोषित अपराधी घोषित करने की प्रक्रिया शुरू की गई। वहीं, बचाव पक्ष ने दलील दी कि आरोपी के कब्जे से कोई मादक पदार्थ बरामद नहीं हुआ है और उसे केवल वित्तीय लेन-देन व रिश्तेदारी के आधार पर मामले में जोड़ा गया है। आरोपी जांच में सहयोग करने के लिए तैयार है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने कहा कि इस स्तर पर साक्ष्यों का विस्तृत परीक्षण नहीं किया जा सकता। एनडीपीएस एक्ट की धारा 27-ए और 29 के तहत वित्तीय सहयोग, साजिश और परिवहन में मदद जैसे पहलुओं की भी जांच की जाती है। अदालत ने माना कि मामला व्यावसायिक मात्रा से जुड़ा है और एनडीपीएस एक्ट की धारा 37 के प्रावधान लागू होते हैं। अदालत ने कहा कि जांच अभी तस्करी नेटवर्क, धन के स्रोत और अन्य आरोपियों की भूमिका का पता लगाने के चरण में है। ऐसे में आरोपी की हिरासत में पूछताछ आवश्यक है। अदालत ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।