भगेड़ (बिलासपुर)। क्षेत्र के हजारों लोगों ने जहां कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन बनने की खुशी मनाई थी, वहीं अब उनकी खुशी पर पानी फिरता नजर आ रहा है। हाल ही में प्रदेश सरकार ने फोरलेन के 100 मीटर के दायरे में निर्माण पर टीसीपी एक्ट लागू किया है। निर्माण करने से पहले टीसीपी की मंजूरी सरकार ने जरूरी की है। इससे क्षेत्र के लोगों की नींद हराम हो गई है। विस्थापित एवं प्रभावित लोगों ने इस फैसले का विरोध किया है। फोरलेन बनने से लोग छोटे-छोटे व्यवसाय करने की तैयारी करने लगे थे। ऐसे मौके पर सरकार ने यह जनविरोधी फैसला लेकर लोगों की भावनाओं के साथ कुठाराघात किया है। इसका विरोध हो रहा है। जनप्रतिनिधियों ने भी इस फैसले को वापस लेने की सरकार से मांग की है। ग्राम पंचायत डमली, बैहना जट्टा, औहर, बकरोआ और पनोह पंचायत प्रतिनिधियों के अलावा स्थानीय लोगों ने इस फरमान को शीघ्र वापस लेने की मांग की है। कहा कि टीसीपी एक्ट लागू होता है तो काफी समस्या का सामना करना पड़ेगा। औहर पंचायत की प्रधान प्रेम लता ठाकुर, उपप्रधान रणजीत वर्धन, बैहना जट्टा के पूर्व प्रधान विजेंद्र चंदेल, वर्तमान प्रधान गौरा चंदेल, बंदना आदि ने बताया कि बिलासपुर के किसान पहले भी भाखड़ा, कोलडैम, एसीसी बरमाणा और रेलवे से विस्थापित हो चुके हैं। लोगों के पास थोड़ी-थोड़ी जमीन बची है वह भी सरकार ने टीसीपी एक्ट के दायरे में ला दी है।
फोरलेन निकलने से लोगों ने अपने व्यवसाय शुरू करने का मन बना रखा था। उनके सपने अब चकनाचूर हो गए हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग पूरी तरह विस्थापित हो गए हैं सरकार उनके लिए नई पॉलिसी लाए, न कि बेरोजगार करने का फैसला लेना चाहिए। सरकार को इसके बारे में शीघ्र ही जनहित में निर्णय लेने की जरूरत है। वही फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के महासचिव मदन लाल ने कहा कि टीसीपी एक्ट के अलावा लोगों को बसाने के लिए कोई नया एक्ट लाना चाहिए था न कि उजाड़ने का। कहा कि यह जनविरोधी फैसला है इसे शीघ्र वापस लेना चाहिए।