जिले में 16 में से 7 एम्बुलेंस संभाल रहीं मोर्चा, 108 कंपनी ने स्वास्थ्य विभाग के साथ बनाया इमरजेंसी सेवा के लिए बैकअप प्लान
विज्ञापन
स्वारघाट और घुमारवीं जैसे दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में प्राथमिकता से एंबुलेंस तैनात
ब्लॉक स्तर पर भी मुख्य अस्पतालों को दिया गया है एंबुलेंस स्टाफ
जिले में संचालित हैं 108 और 102 की कुल 24 एंबुलेंस संचालित
संवाद न्यूज एजेंसी बिलासपुर। प्रदेश में एम्बुलेंस कर्मियों की हड़ताल का असर बिलासपुर में भी देखने को मिल रहा है। जिले में कुल 16 एम्बुलेंस में से फिलहाल 7 गाड़ियां ही सड़कों पर दौड़ रही हैं। ऐसे में आपातकालीन स्थितियों में मरीजों को सेवा मिल रही है, लेकिन कई मरीजों को परेशानी भी झेलनी पड़ी। 102 की सेवाएं पूरी तरह से बंद रहीं।
हड़ताल के बीच जिले के सभी ब्लॉकों में कम से कम एक एम्बुलेंस चालू रखने की कोशिश की जा रही है। श्री नयना देवी, मार्कंडेय, झंडूता और घुमारवीं ब्लॉक में कुछ एम्बुलेंस विभागीय स्टाफ और कुछ सरकारी सहायता से चलाई जा रही हैं। मुख्य फोकस इस बात पर है कि किसी भी ब्लॉक में सेवा पूरी तरह शून्य न हो। जिले के संवेदनशील इलाकों, विशेषकर स्वारघाट, जो कि दुर्घटना संभावित क्षेत्र है, वहां एम्बुलेंस सेवा को प्राथमिकता के आधार पर बहाल रखा गया है।
विज्ञापन
इसके अलावा क्षेत्रीय अस्पताल बिलासपुर, घुमारवीं और मार्कंडेय जैसे बड़े केंद्रों पर भी एम्बुलेंस तैनात हैं ताकि गंभीर मरीजों को रेफर करने या लाने में देरी न हो। एम्बुलेंस सेवाएं संचालित करने वाली कंपनी के अधिकारी राहुल वर्मा ने बताया कि प्रबंधन का कहना है कि वर्तमान में जितनी भी इमरजेंसी कॉल्स आ रही हैं, उन्हें अटेंड किया जा रहा है। हालांकि कर्मियों की कमी के कारण 100 प्रतिशत क्षमता से काम नहीं हो पा रहा है, लेकिन सात गाड़ियां ऑपरेशनल होने से फिलहाल स्थिति काबू में है। उम्मीद जताई जा रही है कि रात्रि शिफ्ट में स्टाफ की संख्या बढ़ने के बाद सेवाओं में और सुधार होगा।
सीएमओ बिलासपुर शशि दत्त शर्मा ने कहा कि जिले में एंबुलेंस स्टाफ के हड़ताल पर जाने से सेवाओं में कोई खासा असर नहीं पड़ा है। बताया कि जिले में 18 एम्बुलेंस 108 की और 6 एम्बुलेंस 102 के तहत चलाई जा रही है। लेकिन इनमें से सिर्फ सात 108 एक्टिव हैं। वहीं, 102 की सेवाएं पूरी तरह से बंद हैं। फिलहाल जिले में इमरजेंसी सेवाएं सुचारू की जा रही हैं। मुख्य अस्पतालों और एक्सीडेंट प्रोन एरिया जैसे स्वारघाट में गाड़ियां तैनात की गई हैं ताकि मरीजों को असुविधा न हो।