आवास और शैक्षणिक सुविधाओं का भी किया जा रहा विस्तार
आवास सुविधा के लिए तैयार की जा रही है 178 करोड़ की परियोजना
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) बिलासपुर प्रबंधन ने वरिष्ठ फैकल्टी की अनुपलब्धता पर कहा कि फैकल्टी रिक्तियों को भरने के लिए प्रयास जारी हैं। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के मार्गदर्शन में संस्थान शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और अनुसंधान में उत्कृष्टता बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
एम्स प्रशासन ने बताया कि फैकल्टी पदों की भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई है। आवेदन मूल्यांकन, साक्षात्कार और अन्य औपचारिकताओं के साथ एक पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जा रही है। यदि नियमित नियुक्तियां समय पर पूरी नहीं हो पाती हैं तो इन पदों को अनुबंध आधार पर भरा जाएगा। संस्थान में आवास की कमी को दूर करने के लिए 178 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी दी गई है। इस परियोजना के तहत 72 आवास, छात्रावास और शैक्षणिक व्याख्यान थिएटर का निर्माण किया जाएगा। निर्माण कार्य अगले 18 महीनों में पूरा होने की संभावना है। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश सरकार केंद्रीय विद्यालय की स्थापना के लिए भी सक्रिय प्रयास कर रही है ताकि संकाय सदस्यों और उनके परिवारों को शिक्षा संबंधी सुविधाएं मिल सकें।
संस्थान ने बताया कि सभी शैक्षणिक कार्यक्रम सुचारू रूप से चल रहे हैं। वर्ष 2020 में शुरू हुआ एमबीबीएस का पहला बैच मार्च 2026 में स्नातक होगा। एमडी, एमएस और डीएम, एमसीएच पाठ्यक्रम भी सफलतापूर्वक चलाए जा रहे हैं। एम्स जल्द ही नर्सिंग में एमएससी पाठ्यक्रम शुरू करने की तैयारी कर रहा है। आपातकालीन चिकित्सा तकनीशियन (ईएमटी) के लिए दो वर्षीय कौशल आधारित डिप्लोमा पाठ्यक्रम भी शुरू किया जा रहा है, जिसमें प्रवेश प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी है।
एम्स बिलासपुर न केवल स्थानीय आबादी बल्कि पड़ोसी राज्यों के मरीजों को भी तृतीयक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने में जुटा हुआ है। संस्थान चिकित्सा अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए भी लगातार प्रयास कर रहा है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय और एम्स बिलासपुर फैकल्टी रिक्तियों को जल्द भरने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। कहा कि जल्द ही इन पदों पर नियुक्तियां पूरी होंगी, जिससे शिक्षा, शोध और स्वास्थ्य सेवाओं में संस्थान अपनी उत्कृष्टता बनाए रखेगा।