एम्स बिलासपुर में सीपीआर प्रशिक्षण देते विशेषज्ञ। स्रोत: एम्स प्रबंधन
अस्पताल परिसर में फैकल्टी के साथ, मरीजों, तीमारदारों को सिखाई जा रही सीपीआर तकनीक
पहले दिन 50 मरीजों के परिचारकों ने प्रशिक्षकों की देखरेख में सीखी जीवन रक्षक तकनीक
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। राष्ट्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के निर्देश पर एम्स बिलासपुर में सीपीआर जागरूकता सप्ताह शुरू हुआ। एम्स में आम जनता, मरीजों के परिचारकों को जीवन रक्षक तकनीकों से अवगत कराने के लिए पहले दिन विशेष प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम हुआ। यह पहल आम नागरिकों को आपातकालीन स्थितियों में सक्षम बनाने और जीवन बचाने की प्राथमिक जानकारी देने के उद्देश्य से की गई है।
कार्यक्रम की शुरुआत कार्यकारी निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ.) दलजीत सिंह (सेवानिवृत्त) के नेतृत्व में सभी स्वास्थ्य कर्मियों और स्टाफ के सीपीआर जागरूकता शपथ लेने से हुई। शपथ के दौरान उपस्थित सभी ने संकल्प लिया कि वे सीपीआर की तकनीक को मरीजों, परिचारकों और आम जनता तक पहुंचाने में पूरी सक्रियता दिखाएंगे। शपथ ग्रहण के बाद ट्रॉमा और इमरजेंसी मेडिसिन विभाग ने हैंड्स-ऑन सीपीआर प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया। इसमें करीब 50 मरीजों के परिचारकों ने भाग लिया और प्रशिक्षकों की देखरेख में जीवन रक्षक तकनीकों का अभ्यास किया। प्रशिक्षण के दौरान जरूरी बिंदुओं पर फोकस किया गया। मदद के लिए तुरंत कॉल करें। रोगी की प्रतिक्रिया और नाड़ी जांचें। छाती पर 100–120 प्रति मिनट गति से संकुचन करें, लगभग 5 सेंटीमीटर गहराई के साथ। प्रक्रिया में व्यवधान कम से कम रखें। प्रशिक्षकों ने बताया कि सही और समय पर सीपीआर करने से हृदय रोगी या किसी आकस्मिक घटना में मरीज की जान बचाने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। एम्स के कुलपति डॉक्टर राकेश कुमार सिंह ने कहा कि यह पहल केवल स्वास्थ्य कर्मियों तक सीमित नहीं है। आम जनता को सीपीआर और आपातकालीन जीवन रक्षक तकनीकों से जोड़ना अभियान का मुख्य उद्देश्य है। अस्पताल की टीम का मानना है कि इस तरह के प्रशिक्षण से नागरिकों में आपातकालीन स्थिति में साहस, तत्परता और दक्षता बढ़ेगी।