डिजिटल न चलाएं
-अप्रैल अंत तक ट्रेनिंग के लिए एम्स से भेजा जाएगा बैच
-पांच दिन की ट्रेनिंग के बाद एम्स में किया जाएगा मेगा ड्रिल का आयोजन
-आपदा के दौरान प्रदेश में घायलों को मिलेगा तुरंत इलाज
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। हिमाचल में प्राकृतिक आपदाओं के दौरान अब घायलों को तुरंत इलाज मिल सकेगा। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना बैटलफील्ड हेल्थ इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर मेडिकल सर्विसेज (भीष्म) के तहत एम्स बिलासपुर की मेडिकल टीम को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस प्रशिक्षण के पूरा होने के बाद एम्स टीम आपदा प्रबंधन से जुड़ी एक मेगा ड्रिल का आयोजन करेगी। अप्रैल के अंतिम सप्ताह में इस बैच को प्रशिक्षण पर भेजा जाएगा।
पांच दिन की ट्रेनिंग पूरी करने के बाद जब विशेषज्ञ वापस आएंगे तो एम्स बिलासपुर में इस योजना के तहत मेगा ड्रिल प्रदर्शन करेंगे। इस मेगा ड्रिल में आपदा स्थल पर भीष्म क्यूब की त्वरित तैनाती का अभ्यास किया जाएगा। मॉक एक्सीडेंट या भूस्खलन जैसी स्थिति बनाकर घायलों को तत्काल चिकित्सा सुविधा देने का परीक्षण दिया जाएगा। डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ को उपकरणों के तेजी से संचालन और इलाज प्रक्रिया का अभ्यास कराया जाएगा। हेलिकॉप्टर या अन्य परिवहन माध्यमों से भीष्म क्यूब को आपदा स्थल पर पहुंचाने की प्रक्रिया की जांच होगी। स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीम के साथ समन्वय स्थापित कर इमरजेंसी रिस्पांस सिस्टम की समीक्षा की जाएगी।
बताते चलें कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने बिलासपुर एम्स को छह करोड़ की लागत से तैयार दो भीष्म क्यूब भेजे हैं। ताकि प्रदेश में आपदा के समय होने वाले घायलों को ओटी से लेकर सभी आपात सेवाएं मौके पर मिलें और आपदा के दौरान होने वाली मौतों को रोका जा सके।
भीष्म क्यूब एक तरह का मोबाइल अस्पताल है, जिसे हेलिकॉप्टर, ट्रक या अन्य साधनों से आपदा प्रभावित क्षेत्र में ले जाया जाएगा। इनकी खासियत यह है कि ये ऊंचाई से गिरने पर भी नहीं टूटते और पानी का इन पर कोई असर नहीं पड़ता। इनमें माइनर ऑपरेशन थिएटर, एक्स-रे, वेंटिलेटर, ब्लड सैंपल जांच और अन्य आपातकालीन चिकित्सा सुविधाएं मौजूद हैं। भीष्म क्यूब लोहे के तीन फ्रेम में बना होता है, जिनमें 12-12 छोटे बॉक्स होते हैं। कुल 36 बॉक्स में चिकित्सा उपकरण, दवाइयां और खाद्य सामग्री रखी जाती हैं। इनके बीच एक छोटा जेनरेटर भी लगाया गया है। इसके अलावा, दो स्ट्रेचर भी दिए गए हैं, जो ऑपरेशन थियेटर में बिस्तर का काम करेंगे। प्रदेश में बादल फटने, भूस्खलन, बाढ़ या अन्य आपदाओं के समय रास्ते बंद होने के कारण घायलों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता था, जिससे कई लोगों की जान चली जाती थी। भीष्म क्यूब से इस समस्या का समाधान होगा और आपदा के दौरान होने वाली मौतों में कमी आएगी।