बरठीं (बिलासपुर)। जिले में सहकारी सभाओं की कार्यप्रणाली पर किसान भड़क गए हैं। सहकारी सभाओं की नियमावली में बीज, खाद, कृषि यंत्र, किटाणु नाशक दवाइयां और अन्य कार्य शामिल हैं। लेकिन सहकारी सभाओं द्वारा नियमों के तहत कार्य नहीं किया जा रहा है। किसानों की फसलों को नहीं खरीदने पर किसानों ने गहरा रोष व्यक्त किया है।
जिले की सहकारी सभाओं में फसलों की खरीद नहीं की गई। सहकारी सभाओं की नियमावली में साफ लिखा है कि किसानों को सहकारी सभाएं बीज, खाद, कृषि यंत्र, कीटाणु नाशक दवाइयां, कुटीर उद्योग, हथकरघा उद्योग, रेशम उद्योग औजार, कृषि क्लीनिक, उन्नत बीज के उत्पादन को बढ़ाने के लिए सहायता, मछली पालन, पशुओं की नस्ल को सुधारने संबंधी आवश्यक कार्रवाई, मुर्गी पालन, छोटे पैमाने पर सिंचाई योजनाएं चालू करना, भूमि संरक्षण के लिए वृक्ष लगाना, उपयुक्त स्थान पर कुएं, जलाशय नालियां व सफाई करने की मशीन आदि सुविधाएं मुहैया करवाई जाएंगी। लेकिन सहकारी सभाएं इस तरफ ध्यान नहीं दे रही हैं। सहकारी सभाएं अपने मुनाफे को बढ़ाने में लगी हुई हैं। सरकार का इन पर नियंत्रण न होने के कारण यह मनमर्जी से ऋण दूसरे प्रदेशों में भी दे रही हैं।
सहकारी सभा बड़गांव के पूर्व प्रधान मनसाराम गौतम सहित अन्य सदस्यों हंसराज गौतम, ऋषि राम गौतम, जगदीश सिंह ठाकुर, बासुदेव ठाकुर, हरि सिंह ठाकुर, धर्मपाल, अमरनाथ, रामप्रकाश, जगदीश चंदेल, प्रकाश चंद, गौतम सहित अन्यों ने बताया कि सहकारी सभाएं चीनी और खाद के अलावा कोई भी सहायता किसानों को उपलब्ध नहीं करवा रही हैं। उन्होंने बताया कि सहकारी सभाओं को जहां अनाज भंडारण के लिए स्टोर की व्यवस्था करनी चाहिए। वहीं किसानों द्वारा तैयार की गई फसलों गेहूं, मक्का, हल्दी, जिमीकंद, अदरक सहित अन्य दलहनी फसलों को भी सरकारी दामों पर किसानों से खरीदना चाहिए। लेकिन सहकारी सभाएं सुस्त रवैया अपनाकर ध्यान नहीं दे रही हैं। किसानों को अपनी उपज को सस्ते दामों पर ठेकेदारों को बेचना पड़ रहा है। इससे उनका भारी भरकम आर्थिक नुकसान हो रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि सहकारी सभाओं में भंडारण की व्यवस्था करवाई जाए ताकि किसान अपनी फसलें आसानी से सहकारी सभाओं में बेच सकें।