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Bilaspur News: स्वारघाट में लकड़ी की तस्करी, 11 वाहन जब्त

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पंजाब ले जाई जा रही थी कशमल सहित अन्य लकड़ी
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केवल एक गाड़ी के पास मिला वैध परमिट, 10 अवैध

संवाद न्यूज एजेंसी
स्वारघाट (बिलासपुर)। विधानसभा क्षेत्र श्री नयना देवी जी के तहत वन विभाग ने कशमल सहित अन्य लकड़ी की तस्करी पर कार्रवाई को अंजाम दिया है। गणतंत्र दिवस के दिन वन विभाग बिलासपुर की रैपिड रिस्पांस टीम (आरआरटी) और वन विभाग स्वारघाट की संयुक्त टीम ने कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन पर थापना के पास नाका लगाकर लकड़ी से लदे कुल 11 छोटे-बड़े वाहनों को पकड़ा। इनमें छह कैंटर और पांच पिकअप वाहन शामिल हैं।
जानकारी के अनुसार यह कार्रवाई रात करीब 11 बजे शुरू हुई और सुबह 4 बजे तक चली। पकड़े गए सभी वाहनों में लकड़ी लदी हुई थी, जिसे पंजाब की ओर ले जाया जा रहा था। जांच के दौरान वाहनों में वालण, खिड़क, पोपलर, शहतूत, चियुली और कशमल प्रजाति की लकड़ी और जड़ें पाई गईं। हालांकि प्रारंभिक जांच में किसी भी वाहन में अवैध इमारती लकड़ी नहीं मिली। वन विभाग के अनुसार केवल एक चालक के पास लकड़ी परिवहन का वैध परमिट पाया गया। शेष 10 वाहनों के चालकों के पास कोई वैध परमिट नहीं था। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर वन विभाग स्वारघाट ने सभी संबंधित वाहनों को जब्त कर लिया है। सभी वाहन और उनमें भरी लकड़ी को वन संपदा निरीक्षण चौकी स्वारघाट लाया गया है, जहां पूरे मामले की जांच जारी है। इस संयुक्त कार्रवाई में रैपिड रिस्पांस टीम बिलासपुर से बीओ तरुण कुमार, फॉरेस्ट गार्ड धर्म सिंह और वन खंड स्वारघाट से वन खंड अधिकारी मान चंद धीमान और बीओ चेकपोस्ट स्वारघाट राकेश चौधरी शामिल रहे। अधिकारियों ने बताया कि आरआरटी को सूचना मिली थी कि कुछ वाहन फोरलेन के रास्ते रात के समय अवैध रूप से लकड़ी को बाहरी राज्यों में ले जा रहे हैं। सूचना के आधार पर थापना स्थान पर नाका लगाया गया और लगातार जांच के दौरान 11 वाहन पकड़े गए।
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वन खंड अधिकारी स्वारघाट मान चंद धीमान ने बताया कि नियमानुसार रात के समय वन संपदा का परिवहन नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद वाहन चालक लकड़ी को फोरलेन के माध्यम से बाहरी राज्यों की ओर ले जा रहे थे। सभी जब्त वाहनों के दस्तावेजों और लकड़ी की वैधता की गहनता से जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ वन अधिनियम के तहत कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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इनसेट
फोरलेन पर चेक पोस्ट न होने से राजस्व को नुकसान

पुराने राष्ट्रीय राजमार्ग के समय स्वारघाट स्थित वन संपदा निरीक्षण चौकी से सरकार को हर साल लाखों रुपये का राजस्व प्राप्त होता था, लेकिन फोरलेन शुरू होने के बाद अधिकांश वाहन इसी मार्ग से गुजर रहे हैं, जबकि विभाग की चेकपोस्ट फोरलेन पर नहीं है। इससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान हो रहा है। यदि फोरलेन पर वन विभाग की निरीक्षण चौकी स्थापित की जाए तो सरकार को सालाना लाखों रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिल सकता है।
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