कर्मचारियों, श्रमिकों ने निकाली रैली, उपायुक्त कार्यालय पर दो घंटे धरना
अस्पताल पहुंचकर एंबुलेंस चालकों की मांगों को भी दिया समर्थन
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। देशव्यापी हड़ताल के समर्थन में वीरवार को जिला मुख्यालय में विभिन्न श्रमिक संगठनों और कर्मचारी यूनियनों ने जोरदार शक्ति प्रदर्शन किया। ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एटक) सहित कई संगठनों के बैनर तले आयोजित इस प्रदर्शन में करीब एक हजार लोगों ने भाग लिया। रैली श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर से शुरू होकर शहर के मुख्य बाजारों से गुजरती हुई उपायुक्त कार्यालय पहुंची, जहां प्रदर्शनकारियों ने करीब दो घंटे तक धरना-प्रदर्शन करते हुए सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी मांगों को लेकर राष्ट्रपति को ज्ञापन प्रेषित किया।
सुबह से ही श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर परिसर में विभिन्न यूनियनों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता जुटने शुरू हो गए थे। हाथों में झंडे, बैनर और मांगों से जुड़े पोस्टर लिए श्रमिकों ने एकजुटता का प्रदर्शन किया। 11:30 बजे रैली मंदिर से शुरू होकर चंपा पार्क, गुरुद्वारा चौक, चेतना चौक और कोर्ट रोड से होते हुए उपायुक्त कार्यालय पहुंची। रैली के दौरान मजदूर एकता जिंदाबाद, श्रम कानून बहाल करो, निजीकरण बंद करो जैसे नारों से शहर का माहौल गूंज उठा।
प्रदर्शन में आशा कार्यकर्ता, मिड डे मील वर्कर, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, निजी कंपनियों में कार्यरत मजदूर, निर्माण श्रमिक, एंबुलेंस चालक और असंगठित क्षेत्र के अनेक कर्मचारी शामिल रहे। महिला कार्यकर्ताओं की उपस्थिति भी बड़ी संख्या में रही, जिन्होंने अपने अधिकारों और मानदेय वृद्धि को लेकर आवाज बुलंद की। आयोजकों ने इसे जिले में श्रमिक एकजुटता का बड़ा प्रदर्शन बताया।
उपायुक्त कार्यालय के बाहर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने केंद्र और प्रदेश सरकार की श्रम नीतियों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि पुराने 29 श्रम कानूनों को समाप्त कर चार लेबर कोड लागू करने से मजदूरों के अधिकार कमजोर हुए हैं। श्रमिकों की सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा और रोजगार स्थिरता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। वक्ताओं ने मांग की कि चारों लेबर कोड वापस लिए जाएं और पुराने श्रम कानूनों को बहाल किया जाए।
सभा में सभी श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपये प्रतिमाह तय करने की मांग प्रमुखता से उठाई गई। ठेका प्रथा समाप्त कर समान काम के लिए समान वेतन देने की बात कही गई। आशा, आंगनबाड़ी और मिड डे मील कार्यकर्ताओं को नियमित करने तथा उन्हें कर्मचारी का दर्जा देने की मांग दोहराई गई। वक्ताओं ने कहा कि इन कार्यकर्ताओं पर योजनाओं का बोझ बढ़ाया जा रहा है, लेकिन मानदेय में वृद्धि नहीं की जा रही।
मनरेगा को लेकर भी प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने मनरेगा के पुराने स्वरूप को बहाल करने, 150 दिन रोजगार की गारंटी देने और केंद्र द्वारा दी जाने वाली 90 प्रतिशत वेतन राशि को यथावत रखने की मांग की। इसके अलावा बढ़ती महंगाई पर रोक लगाने, दाल, तेल, रसोई गैस, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी लाने की मांग भी उठाई गई। वक्ताओं ने कहा कि महंगाई की मार से मजदूर और मध्यम वर्ग दोनों परेशान हैं।
परिवहन क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों ने मोटर व्हीकल एक्ट में संशोधन के बाद बढ़ाए गए भारी जुर्माना और दंड प्रावधानों पर आपत्ति जताई। उन्होंने मांग की कि ड्राइवरों और ट्रांसपोर्ट मालिकों के हितों को ध्यान में रखते हुए कानून में संशोधन किया जाए। साथ ही परिवहन क्षेत्र में बड़ी कॉरपोरेट कंपनियों के बढ़ते दखल पर चिंता व्यक्त की गई और स्थानीय लोगों को रोजगार में प्राथमिकता देने की मांग की गई। इसके बाद उपायुक्त के माध्यम से
धरना समाप्त होने के बाद प्रदर्शनकारी अस्पताल भी पहुंचे, जहां एंबुलेंस चालकों की समस्याओं को उठाया गया। चालकों ने कार्य परिस्थितियों, मानदेय और सुरक्षा से जुड़ी मांगें रखीं, जिनका श्रमिक संगठनों ने समर्थन किया। नेताओं ने कहा कि एंबुलेंस चालक स्वास्थ्य व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं और उनके साथ किसी भी प्रकार का अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस दौरान काफी संख्या में पुलिस बल मौजूद रहा ताकि व्यवस्था प्रभावित न हो। इस मौके पर एटक राज्य सचिव प्रवेश चंदेल, सीटू के जिलाध्यक्ष लखनपाल शर्मा, उपाध्यक्ष प्रोमिला वसु, सचिव विजय शर्मा, राजकुमार, कर्मचंद, बलबीर, अमृत पाल और शुभम ठाकुर सहित विभिन्न मजदूर नेता मौजूद रहे।
इनसेट
स्कूल प्रबंधन ने संभाला मिड-डे-मील
हड़ताल के चलते स्कूलों में खाना बनाने का कार्य स्कूल प्रबंधन ने संभाला। कई स्कूलों में एसएमसी सदस्यों ने बच्चों के लिए खाना बनाया, तो कहीं पर मल्टी टास्क वर्कर ने अध्यापकों के साथ बच्चों के लिए खाना बनाया। हड़ताल के बावजूद बच्चों को स्कूल में खाना मिला।
एंबुलेंस चालकों की पांच दिन की हड़ताल शुरू
वीरवार से एंबुलेंस चालकों की पांच दिन की हड़ताल शुरू हुई। चालकों ने रैली में भाग लिया और अपनी मांगों को पूरा करने का आग्रह किया गया। एंबुलेंस चालक यूनियन के प्रधान सुनील ने बताया कि हड़ताल के चलते उन्होंने गाड़ियों की चाबियां अस्पताल प्रबंधन को सौंप दी हैं। इससे लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। हालांकि प्रबंधन की ओर से विभाग के चालकों को एंबुलेंस की जिम्मेदारी दी गई है ताकि लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े।
बिलासपुर में रैली निकालते विभिन्न संगठनों के सदस्य। संवाद