बिलासपुर। बिलासपुर की गोबिंदसागर झील में इस बार एक भी विदेशी परिंदे नहीं देखे गए हैं। पिछले साल हालांकि कुछ एक विदेशी पक्षियों की प्रजातियां यहां पर देखी गई हैं। बदलती आबोहवा की वजह से इस स्थान पर प्रवासी पक्षियों ने शगुन के लिए भी पड़ाव नहीं डाला। यह स्थिति पर्यावरणविदों के लिए तो चिंताजनक है, साथ ही पर्यटन व्यवसाय की नजर से भी गंभीर चेतावनी है।
वन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार कुछ साल पहले यहां पर कुछ विदेशी पक्षी आते थे जिसके चलते हर साल थोड़े बहुत पक्षी यहां पर पहुंच जाते थे लेकिन 2018 सत्र में एक भी विदेशी पक्षी यहां पर नहीं देखा गया है।
वन विभाग के अधिकारियों की माने तो यहां पर विदेशी पक्षियों का न पहुंचना यहां की जलवायु सहित यहां के पानी में कम स्थिरता बताई जा रही है क्योंकि अधिकारी बताते हैं कि यहां पर जलवायु और पानी में भोजन नहीं मिलने से पक्षी यहां पर नहीं पहुंच रहे हैं जिसके कारण विदेशी परिंदों को यहां पर आना फायदेमंद नहीं लग रहा। वहीं, पौंग डैम की बात की जाए तो इस सत्र में वहां पर भी विदेशी पक्षियों की संख्या कम हुई है।
पिछले सत्र के मुताबिक इस सत्र वहां पर भी कम पक्षी देखे गए हैं। गौर हो कि बिलासपुर की गोबिंद सागर झील में पिनटेल, सारस, मुरैन पनकौआ, कॉमन टेल प्रजाति आदि देखी गई है लेकिन इस सत्र तो एक भी विदेशी प्रजाति यहां पर नहीं देखी गई है।
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विभाग ने नहीं की रिपोर्ट तैयार
वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार बिलासपुर में साइबेरिया से विदेशी परिंदे आते थे जिसकी रिपोर्ट वन विभाग एकत्रित करता था, लेकिन इस सत्र एक भी विदेशी परिंदा यहां नहीं पहुंच पाया है। इसके चलते वन विभाग ने इस सत्र की कोई भी रिपोर्ट तैयार नहीं की है।
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पांच हजार किलोमीटर रास्ता तय कर पहुंचते हैं हिमाचल
साइबेरिया में जब रक्त जमा देने वाली सर्दी शुरू होती है, तब तापमान शून्य से चालीस डिग्री नीचे चला जाता है। चारों ओर बर्फ का साम्राज्य छा जाता है। ऐसे प्रतिकूल समय में दुर्लभ सारस और विभिन्न नस्लों के बहुरंगी पक्षी भारत और एशिया के अनुकूल ठिकानों की ओर समूहों में उड़ान भरते हैं और करीब पांच हजार किलोमीटर की दूरी तय कर हिमाचल में पहुंचते हैं।
बिलासपुर में इस सत्र एक भी विदेशी परिंदे नहीं पहुंचा है। यहां की जलवायु और पानी में स्थिरता कम होने के चलते यहां पर विदेशी मेहमान नहीं आते हैं।
...आरएस पटियाल, वन अरण्यपाल, बिलासपुर।
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