अमर उजाला ब्यूरो
घुमारवीं (बिलासपुर)। घुमारवीं की अतिरिक्त न्यायिक दंडाधिकारी संदीप सिंह सिहाग की अदालत ने शिकायत कर्ताओं के साथ रास्ता रोककर मारपीट तथा प्राइवेट बस को नुकसान पहुंचाने के मामले में नामजद दो आरोपियों को दोषी करार दिया।
मामले की जानकारी देते हुए अतिरिक्त लोक अभियोजक अनिल गुलेरिया ने बताया कि यह मामला शिकायतकर्ता मस्तराम पुत्र समुंदा राम निवासी पलेला डाकघर कुहमझवाड़ तहसील घुमारवीं की शिकायत पर दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता का कहना था कि वह एक प्राइवेट बस पर बतौर चालक कार्यरत था तथा उस बस का परिचालक सोनू ठाकुर पुत्र जोध सिंह गांव रोपा था। शिकायतकर्ता का कहना है कि 26 जनवरी 2009 को वह बस को लेकर बिलासपुर से कुहमझवाड़ गया था। उसके बाद बस से सवारियों को उतारकर बस को पार्क करने के लिए मालिक के घर जा रहा था। जब वह बस को लेकर 250 मीटर आगे ही पहुंचा था तो नाले के पास मामले का आरोपी मनोज कुमार और चमन लाल हाथ में लोहे की रॉड व डंडे लेकर खड़े थे।
उन्होंने जबरदस्ती बस को रोक दिया। आरोपियों ने हाथ में लिए रॉड व डंडों के साथ बस के आगे के शीशे को तोड़ दिया तथा खिड़कियों के शीशे भी तोड़ दिए। उसके बाद दोनों बस के अंदर घुसे और कंडक्टर के साथ मारपीट की। इस मारपीट में परिचालक के सिर पर चोटें आईं। उस समय बस के अंदर 2 लोग सवार थे। इन लोगों ने परिचालक को आरोपियों से बचाया। पुलिस ने इस शिकायत के आधार पर दोनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 341, 323, 427 व 34 के तहत आपराधिक मामला दर्ज कर लिया।
अदालत ने पर्याप्त साक्ष्यों के आधार पर दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया लेकिन अदालत ने दोनों आरोपियों को प्रोबेशन अधिनियम के तहत लाभ देने के उद्देश्य से जिला प्रोबेशन अधिकारी से दोनों आरोपियों के आचरण से संबंधित रिपोर्ट अदालत में तलब की है।