बिलासपुर। कुटैहला पंचायत में कुष्ठ रोग जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्वारघाट प्रभारी डॉ. नेहा नड्डा ने की। शिविर में सहायक कुष्ठ रोग अधिकारी विवेक कुमार शर्मा ने कुष्ठ रोग के बारे में जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि यह रोग अन्य रोगों की तरह साधारण रोग है, कुष्ठ रोग का इलाज संभव है। यह छुआछूत (स्पर्श) करने से नहीं होता, न पैतृक रोग है न ही देवी-देवताओं का प्रकोप है। न ही पुराने पापों का फल है। यह रोग एक जीवाणु से होता है जिसका नाम माइक्रो बैक्टीरियम लेपरे है। जो मनुष्य के शरीर की चमड़ी तथा तंत्रिकाओं को प्रभावित करता है।
कुष्ठ रोग के लक्षणों में शरीर पर हल्के पीले, तांबे रंग के दाग पड़ना तथा उनमें सूनापन होना खासकर उसमें खुजली न होना, हाथ पांव में सुनापन आ जाना या उनमे चींटियों जैसे के चलने का आभाष होना तथा हाथ पांव की अंगुलिया टेढ़ी होना, हाथपांव का झूल जाना, उनकी पकड़ कमजोर होना, आंख की पलकों का बंद न होना, भौओं के बाल झड़ना, नाक से लगातार खून रहित पदार्थ का बहना, चेहरा लाल तथा चमकीला होना, यह कुष्ठ रोग के लक्षण हो सकते है। उन्होंने कहा कि इसका उपचार मात्र 6 महीने का है।
इस अवसर पर पुरुष स्वास्थ्य पर्यवेक्षक सीताराम, करतार सिंह, पुरुष स्वास्थ्य कार्यकर्ता श्याम लाल, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता माया देवी, अर्चना, सीमा, चंपा देवी, सरोज बाला, प्रोमिला देवी, मोना देवी, ऊषा देवी, शीला देवी, रजो देवी, सलोचना, राम दुलारी, संदीप कौर, रीता, सुमन लता, विनता देवी, उर्मिला देवी, जमना देवी, शकुंतला देवी सहित अन्य उपस्थित थे।