अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर। बिलासपुर अस्पताल में आपातकाल के समय लोगों को अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन की सुविधा नहीं मिल रही है। मजबूरी में शाम और रात के समय आने वाले मरीजों को अपना अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए निजी क्लीनिकों के चक्कर काटने पड़ते हैं। लाख मन्नतें करने के बाद कोई निजी अस्पताल वाला अल्ट्रासाउंड करने को राजी होता है लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आखिर जिला के सबसे बड़े अस्पताल में रात के समय लोगों को अल्ट्रासाउंड की सुविधा क्यों नहीं मिल पा रही है।
चंडीगढ़-मनाली हाईवे पर बढ़ते हादसों की वजह से बिलासपुर जिला अस्पताल का अपना ही एक विशेष महत्व है। यहां पर हर समय हादसों में घायल लोगों के पहुंचने का सिलसिला लगा रहता है। इसके अलावा कभी लावारिस पशुओं के हमले से घायल लोगों का आना भी लगा रहता है। ऐसे में हादसों में शरीर के अंदर कोई परेशानी न हो गई हो इसका पता अल्ट्रासाउंड से ही लग पाता है लेकिन जिला अस्पताल में शाम और रात को अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं मिलती है। न ही किसी घायल को सीटी स्कैन की सुविधा मिलती है। इसके चलते डॉक्टरों को मजबूरी में मरीजों को शिमला या चंडीगढ़ रेफर करना पड़ता है।
दो दिन पहले भी यहां पर बैल के हमले से घायल एक महिला को शाम पांच के समय उपचार के लिए लाया गया। हालांकि आपातकाल में महिला का एक्स-रे तो जिला अस्पताल में ही हो गया लेकिन महिला को अल्ट्रासाउंड के लिए दर-दर भटकना पड़ा। महिला की हालत इस कद्र खराब थी कि वह चल भी नहीं सकती थी। उसके साथ आए परिजनों ने पहले जिला अस्पताल के साथ लगते एक निजी अस्पताल को अल्ट्रासाउंड के लिए पूछा तो उन्होंने साफ मना कर दिया। उसके बाद कोर्ट रोड स्थित एक निजी अस्पताल में कड़ी मशक्कत के बाद अल्ट्रासाउंड करवाया। जिस तरह एक अल्ट्रासाउंड के लिए परिजनों व घायल महिला को दर-दर भटकना पड़ा, उससे जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं के दावों की पोल खुल गई है।
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इस बारे में सीएमओ से पूछा जाएगा : स्वास्थ्य मंत्री
इस संबंध में स्वास्थ्य मंत्री विपिन परमार का कहना है कि जिला अस्पताल में आपातकाल के समय लोगों को अल्ट्रासाउंड व सीटी स्कैन की सुविधा मुहैया क्यों नहीं करवाई जा रही है। इस संबंध में सीएमओ बिलासपुर से पूछा जाएगा। लापरवाही बरतने पर कार्रवाई भी की जाएगी। सरकार लोगों के स्वास्थ्य को लेकर सचेत है। सरकारी अस्पतालों में मरीजों का हर सुविधा मुहैया करवा अधिकारियों की जिम्मेवारी है।