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एसडीएम कार्यालय नहीं निपटा रहे लोगों की आपत्तियां

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जुखाला (बिलासपुर)। करीब 5 हजार करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले शिमला-धर्मशाला फोरलेन निर्माण में देरी का मुख्य कारण संबंधित जिलों के एसडीएम कार्यालयों द्वारा समय पर आपत्तियों का निपटारा न करना है। कार्यालयों से समय पर निपटारा न किए जाने से भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है। इसी कारण एनएचएआई अभी तक धर्मशाला से ज्वालाजी तक पहले फेज का टेंडर भी नहीं कर पाई है। ऐसे में 2021 तक फोरलेन को पूरा करने का लक्ष्य अभी तक हाथी के दांत ही साबित हो रहा है।
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गौरतलब है कि शिमला-धर्मशाला फोरलेन को पांच फेज में बांटा गया है। जिसमें पहले फेज में धर्मशाला से ज्वालाजी, दूसरे फेज में ज्वालाजी से हमीरपुर, तीसरे फेज में हमीरपुर से घुमारवीं, चौथे फेज में घुमारवीं से भराड़ीघाट, पांचवें फेज में भराड़ीघाट से शिमला तक काम होना है। उक्त पांच फेज के अलावा ब्रह्मपुखर से कंदरौर डबललेन का टेंडर भी छह महीनों में करने का दावा किया था। परंतु अभी तक तीन बार टेंडर कॉल करने पर धर्मशाला-ज्वालाजी तक का टेंडर नहीं हो पाया है। इससे नहीं लगता कि 2021 तक शिमला-धर्मशाला फोरलेन पूरा होगा। इस फोरलेन के बन जाने पर हिमाचल में पर्यटन को बढ़ावा मिलना था। शिमला-धर्मशाला की दूरी भी कम होनी थी।
निर्देशक बाईए राउत ने बताया कि भूमि अधिग्रहण की धीमी प्रक्रिया व एसडीएम कार्यालयों में लोगों की आपत्तियों का सही समय पर निपटारा न होने के कारण टेंडर प्रक्रिया में देरी हो रही है। अगर इन कार्यों में तेजी आई तो इस फोरलेन को 2021 में पूरा करने में कोई परेशानी नहीं है।
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वाया बिलासपुर होकर गुजरेगा धर्मशाला-शिमला फोरलेन
इस बीच एनएचएआई ने उन अटकलों को खारिज किया कि शिमला-धर्मशाला फोरलेन एम्स के बजाय वाया जुखाला से होकर गुजरेगा। एनएचएआई के परियोजना निदेशक का कहना है कि फोरलेन एम्स से होकर गुजरेगा। उन्होंने बताया कि ब्रह्मपुखर से कंदरौर सड़क को डबल लेन किया जाएगा। ताकि मनाली पर्यटन स्थल के लिए पर्यटकों को लंबे रूट से न गुजरना पड़े। इस में पुराने जर्जर पुलों को बदला जाएगा व इस का निर्माण इस तरह से किया जाएगा।
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