बिलासपुर। जिला में 108 और 102 एंबुलेंस कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने के बाद आपातकाल के लिए आने वाली कॉल दर में भारी गिरावट आई है। 108 एंबुलेंस के लिए जहां पहले जिला बिलासपुर में रोजाना 25 से 30 कॉल आती थीं वह अब घट कर 10 से 12 रह गई है। कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने के बाद से लोगों का एंबुलेंस सेवा पर से विश्वास भी कम होता जा रहा है। अस्पतालों में लोग अपने निजी वाहनों में मरीजों को लेकर पहुंच रहे हैं।
हालांकि बिलासपुर जिला में 108 व 102 एंबुलेंस कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग की ओर से होमगार्ड के चालक तैनात कर दिए हैं, जबकि फार्मासिस्ट के तौैर पर राष्ट्रीय बाल सुरक्षा कार्यक्रम के फार्मासिस्टों को तैनात किया गया है जिससे 108 एंबुलेंस ने सड़कों पर दौड़ना शुरू कर दिया है।
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जिला में इस समय 108 एंबुलेंस 11 और 102 एंबुलेंस छह हैं जो जिला भर में मरीजों को आपातकाल के समय अस्पताल पहुंचाती हैं। इन एंबुलेंस सेवाओं में ज्यादातर लोग भी विश्वास करने लग गए थे लेकिन जिस तरह से हड़ताल पर जाने के बाद आपातकाल कॉल में कमी आई है, उससे लोगों का विश्वास भी कम होता दिख रहा है। जिला के ज्यादातर स्वास्थ्य केंद्रों में लोग मरीजों को निजी वाहनों में लेकर पहुंच रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने आपातकाल में किसी को रोगी वाहन न मिले तो इसके लिए अन्य नौ रोगी वाहन भी राष्ट्रीय बाल सुरक्षा कार्यक्रम के तहत सड़कों पर उतार दिए हैं।
बिलासपुर जिला के 108 एंबुलेंस सेवा के प्रभारी साहिल का कहना है कि कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने के बाद आपातकाल के लिए आने वाली कॉल में कमी आई हैं। जिला भर में जहां पूरे दिन 25 से 30 कॉल आती थीं, वहीं अब यह घट कर 10 से 12 रह गई हैं। जल्द ही एंबुलेंस स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से सुचारु रूप से शुरू हो जाएंगी।