शाहतलाई(बिलासपुर)। कोटधार क्षेत्र में सोमवार और मंगलवार रात को आए तूफान से आम की फसल को नुकसान पहुंचने से बागवानों के चेहरों पर मायूसी छा गई है। उल्लेखनीय कि जिले में 3200 हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र पर आम की पैदावार की जाती है। इस वर्ष आम की फसल का वर्ष न होने के कारण इस मर्तबा आम की पैदावार कम होने पर किसानों ने अच्छे-खासे दाम मिलने की उम्मीद लगाई है लेकिन बेमौसमी बारिश व तेज तूफान ने बागवानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
बागवान बलदेव कुमार, चंद्रकुमार, योगराज, प्रेम चंद, आशा देवी, बाबु राम, जगदीश चंद, सोम राज का कहना है कि इस वर्ष आम का फसली वर्ष न होने के कारण आम के पौधों पर कम बूर आया है। बागवानों का कहना है कि अगर फसल कम हो तो उन्हें बाजार में अच्छे-खासे दाम मिलने से उनकी आर्थिकी में सुधार होगा।
मौसम के बदलते तेवर और तूफान से आम का बूर शुरूआती ही दौर में ही झड़ गया जिससे उन्हें अब डर सताने लगा है कि अगर मौसम ऐसा ही रहा तो आम की फसल पर बीमारियों का प्रकोप बढ़ सकता है जिससे उन्हें नुकसान उठाना पड़ सकता है।
उधर जब इस संदर्भ में जिला बिलासपुर उद्यान विभाग के उपनिदेशक डॉ. विनोद शर्मा से बात की गई तो उन्होंने बताया कि आम पर बूर आने का शुरूआती दौर है तूफान से हुए नुकसान का जायजा लिया जा रहा है। उन्होंने बागवानों को सलाह दी है कि इस बदलते मौसम में आम की फसल पर पाडर मिलडू नामक रोग का प्रभाव बढ़ सकता है। इसके लिए बागवानों को एक लीटर पानी में एक ग्राम बैवस्टीन का घोल बना कर छिड़काव करना चाहिए ताकि समय रहते रोग की रोकथाम हो सके।