अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर। जिले में फैले डेंगू ने कई सालों के रिकार्ड तोड़ दिए हैं। बुधवार को स्वास्थ्य विभाग की आई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि अब तक डेंगू के मामले 1563 तक पहुंच गए हैं लेकिन स्वास्थ्य विभाग अभी भी कह रहा है कि डेंगू पर रोकथाम हो गई है। धरातल की रिपोर्ट दिखाने में स्वास्थ्य विभाग परहेज कर रहा है। बिलासपुर के हालात ऐेसे हो गए हैं कि यहां पर अधिकतर एक परिवार का एक सदस्य तो डेंगू की चपेट में आ रहा है। इसके चलते डेंगू की रोकथाम के लिए विभाग के हर प्रयास नाकामयाब हो गए हैं।
आए दिन विभाग शहर और अन्य स्थानों में फॉगिंग तो करवा रहा है, लेकिन अब फॉगिंग करवाने का कोई फायदा ही नहीं है क्योंकि जब विभाग को कसरत करनी चाहिए थी तब विभाग बंद कमरों में बैठकर योजनाएं बनाता रहा। अगर विभाग उस समय कड़े नियम अपनाकर डेंगू को रोकने के लिए कुछ प्रयास करता तो आज बिलासपुर के यह दिन नहीं होते।
बता दें कि बिलासपुर में डेंगू नवंबर 2017 से फैलना शुरू हो गया था। सबसे पहले डेंगू का मामला डियारा सेक्टर के बुजुर्ग हो हुआ था। इसके चलते यह मामले 14 से 15 भी हो गए थे लेकिन विभाग ने यह बात भी गुप्त रूप से रखी। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों द्वारा बरती गई इन लापरवाही के चलते आज बिलासपुर में डेंगू का आंकड़ा 1500 को पार कर गया है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में अभी तक बिलासपुर के 1444, मंडी केे 102, हमीरपुर के 3, कुल्लू के 6, सोलन के 5 और अन्य के 3 लोगों का क्षेत्रीय अस्पताल बिलासपुर में इलाज किया गया है। एमओएच डॉ. प्रविंद्र शर्मा ने बताया कि बुधवार को डेंगू के नौ मामले सामने आए हैं। विभाग डेंगू की रोकथाम के लिए प्रयास कर रहा है।
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केंद्र तक की टीमेें बिलासपुर हुई फेल
बिलासपुर में पुडूचरी, दिल्ली, शिमला और टांडा की टीमों ने कुछ समय पहले प्रभावित एरिया का दौरा किया था। इस दौरान विशेषज्ञों ने पाया कि बिलासपुर में फैले डेंगू का लारवा लाखों की तादाद में पैदा हो गया है। वहीं, यहां पर फैलने वाले डेंगू का मुख्य कारण यहां पर पसरी गंदगी है। जब तक गंदगी को सुचारु रूप से खत्म नहीं किया गया तब तक यह डेंगू खत्म नहीं होगा लेकिन स्वास्थ्य विभाग और नगर परिषद का तालमेल सही न होने के चलते दोनों विभाग एक दूसरे पर नाकामयाबी का ठिकरा फोड़ते रहे। यहीं कारण है कि आज बिलासपुर में डेंगू को रोकना विभाग के लिए गले की फांस बन गया है।