अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर। बिलासपुर के ज्योरीपतन घाट में मत्स्य सहकारी सभा समितियों की 13 समितियों की संयुक्त बैठक का आयोजन किया गया जिसमें कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन निर्माण से निकल रहे मलबे को गोबिंद सागर झील में डंप किए जाने को लेकर चरचा की गई। बैठक की अध्यक्षता मत्स्य सहकारी सभा समिति ब्लॉक के प्रधान श्यामलाल ने की। बैठक में कहा गया कि प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड बिलासपुर के अधिकारी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं, जिससे कंपनी बिना किसी रोकटोक के सतलुज नदी में मिट्टी डंप कर रही है।
प्रधान श्याम लाल ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि मछुआरों का किसी प्रकार से शोषण नहीं होने दिया जाएगा। प्रशासन सड़क निर्माण में कंपनी की ओर से की जा रही अवैध डंपिंग को रोकने में नाकाम साबित हो रही है। इस मौके पर सभी मछुआरों ने कंपनी को ब्लैक लिस्ट करने पर जोर दिया जिसका सभी मछुआरों ने पूर जोर समर्थन किया।
बैठक में विभिन्न समितियों के दर्जनों मछुआरे उपस्थित रहे। मछुआरों ने कहा इस डंपिंग से मछुआरा वर्ग ही नहीं बल्कि वोटिंग, पर्यावरण, भाखड़ा बांध परियोजना भी बुरी तरह से प्रभावित हो रही है। इतना सब कुछ होने के बाद भी प्रशासन की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। मछुआरों का आरोप है कि पर्यावरण अभियंता व वन विभाग अवैध डंपिंग को रोक पाने में पूरी तरह से विफल है। ऐसा लगता है कि इनकी मिलीभगत से ही अवैध डंपिंग की जा रही है। अगली बैठक चार सितंबर को जड्डू में होगी, जिसमें आगामी रणनीति तैयार की जाएगी।
बैठक में भाखड़ा मत्स्य सहकारी सभा समिति के प्रधान तिलकराज, बड़ीवाला उपसमिति के प्रधान खेमचंद, दाड़ीबाड़ी के सचिव कृष्णु राम, बलघाड़ समिति के सेल्समैन अमरलाल, ज्योर समिति के प्रधान बुद्धिराम, जगातखाना के सचिव दीपचंद, दौलाधार के सेल्समैन देवराज, बागी समिति के प्रधान रोहित कुमार, समिति धनी पारली के प्रधान धर्मपाल, जड्डू समिति के प्रधान कर्मचंद, जोड़ध्यानी के उपप्रधान घनश्याम, बिंगुली समिति के प्रधान कृष्णुराम, डीपीएफ बिंगुली के प्रधान हंसराज सहित मछुआरे उपस्थित थे।
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