अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन निर्माण के दौरान मौजा बागठेहडू के नंबर खसरा 125/2 पर प्रभावित लोगों को यह पता नहीं लग पा रहा है कि उनकी जमीन कहां और सरकारी जमीन कहां पर है। इस कारण तीन परिवार अपने लिए मकान तक नहीं बना पा रहे हैं। तीनों परिवार गर्मी और बरसात के मौसम में तंबू लगा कर रहने को मजबूर हैं। वहीं प्रार्थी की शिकायत पर एक बार फिर से अब जिला राजस्व अधिकारी देवी सिंह के कार्यालय से पत्र संख्या बीएएस - एस - के - 12 - (90)/2008-वीआई 36560 के तहत भू-अर्जन अधिकारी को आदेश दिए गए हैं कि 15 दिनों के अंदर पूरे मामले की छानबीन कर सरकारी भूमि की फील्ड बुक और ततीमा में कितनी भूमि शेष बची है बताएं ताकि उस जमीन को निशानदेही के दौरान मौके पर बुर्जियां लगाई जा सकें।
प्रार्थी मदन लाल शर्मा, राम पाल, निर्मला देवी ने बताया कि पहले बिना निशानदेही कोर्ट के आदेशों का हवाला देकर उनके घर गिरा दिए गए। अब जब वह लोग बार-बार प्रशासन से निशानदेही करने की मांग कर रहे हैं कि उनकी कितनी जमीन शेष कहां बची है बताई जाए ताकि वह फिर से अपने घरों का निर्माण कर सके। इस बाबत बार-बार मांग के बाद भी सरकारी अमला इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। इस कारण भरी गर्मी और भारी बरसात में भी उक्त परिवार अपने बच्चों और बुजुर्गों के साथ तंबू में रहने को मजबूर हैं क्योंकि बिजली, पानी और अन्य सुविधाएं न होने के कारण यह परिवार कभी भी हादसे का शिकार हो सकते हैं।
इन लोगों ने बताया कि अगर 15 दिन में उन्हें जमीन के बारे नहीं बताया गया तो वह मजबूरी में सड़क के बीच में मकान का निर्माण करेंगे जिसकी पूरी जिम्मेवारी भू-अर्जन अधिकारी व अन्य संबंधित विभागों की होगी।