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अस्पताल का दर्जा तो बढ़ा पर स्वास्थ्य सेवाएं बेहाल

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बरठीं (बिलासपुर)। 25 पंचायतों की आबादी के स्वास्थ्य का जिम्मा संभालने वाले बरठीं स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा भले ही सिविल अस्पताल कर दिया गया हो, लेकिन सुविधाएं पीएचसी से भी बदतर हैं। अस्पताल में चिकित्सकों सहित 12 पद रिक्त हैं। 50 की जगह मात्र 12 ही बेड हैं। इस कारण हजारों की आबादी को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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लंबे समय से चिकित्सकों के पद रिक्त चल रहे हैं। एक्सरे मशीन दो वर्षों से धूल फांक रही है। सिविल अस्पताल में जहां 6 चिकित्सक होने चाहिए। मात्र तीन चिकित्सक सेवाएं दे रहे हैं। इसके अलावा दंत व आंखों के चिकित्सक भी नहीं हैं। मरीजों को निजी चिकित्सकों के पास इलाज करवाना पड़ता है।
यही नहीं 6 नर्सों के पद भी रिक्त चल रहे हैं। जबकि तीन चपरासी के पद खाली हैं। स्वीपर भी नहीं है, इससे चारों तरफ गंदगी का आलम है। लैब में कार्यरत कर्मचारियों का कहना है कि बिना स्वीपर के उन्हें खुद कमरों की सफाई करनी पड़ती है।
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सिविल अस्पताल में 50 बेड होने चाहिए। जबकि यहां पर मात्र 12 बेड से काम चलाया जा रहा है। बिना रेडियोलॉजिस्ट के एक्सरे मशीन दो वर्षों से जस की तस पड़ी है। लैब में दो कर्मचारियों द्वारा टेस्ट किए जाते हैं। वर्तमान में लैब में आरएनटीसीपी, मलेरिया, एएमसी, आईसीटीसी और जनरल बायो केमिस्ट्री के टेक्निकल की भारी कमी चल रही है।
रात्रि को कोई भी चिकित्सक ड्यूटी पर नहीं होता है। रविवार को मरीजों को देखने से मना तक कर दिया जाता है। इस संदर्भ में जब चिकित्सक से बात करनी चाहिए तो उन्होंने दूरभाष बंद कर दिया और बात नहीं की। इस बारे में लोगों ने बीएमओ झंडूता से शिकायत की है।
बीएमओ झंडूता डॉ. राजीव गर्ग ने बताया कि यह मामला उनके ध्यान में है। रिक्त पदों के बारे में सरकार को लिखा गया है। स्वयं मौके पर निरीक्षण कर समाधान करने की कोशिश करेंगे।
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