बिलासपुर।
जबली के अध्यात्म निकेतन सत्संग भवन में चार दिनों से चल रहे सिद्ध महायोग एवं सुरत शब्द योग साधन सत्संग एवं दीक्षा समारोह का समापन शनिवार को हुआ। इस अवसर पर सैकड़ों साधक उपस्थित थे। उन्होंने चार दिन तक अध्यात्म निकेतन आश्रम ग्वालियर से आए शक्तिपाताचार्या संत समर्थ सद्गुरु कृपाल सिंह महाराज की ओर से शक्तिपात दीक्षा लाभ एवं प्रवचनों की पावन अमृत वर्षा का रसपान किया।
जबली के आश्रम में सत्संग का आयोजन हिमाचल प्रदेश अध्यात्म निकेतन सत्संग मंडल की ओर से 14 नवंबर से किया गया। सत्संग समारोह में गुरु महाराज सत्संग मंडली के साथ पधारे। जबली आश्रम में तीन दिन तक गुरु महाराज की उपस्थिति में अध्यात्मिक ऊर्जा से ओत प्रोत रहा। सभी साधक ने इसका भरपूर लाभ उठाया।
महराज कहा कि आत्मानुभूति ही मानव जीवन का परम लक्ष्य है। प्रत्येक व्यक्ति की चेतना संसार की ओर बहिर्मुखी रूप में जागृत एवं क्रियाशील है। अंतर्मुखी अर्थात आत्मा की ओर से सुप्तावस्था में है। समर्थ सद्गुरु की कृपा से व्यक्ति की चेतना, चित्ती शक्ति आत्मा की ओर अंतर्मुखी रूप में जागृत होकर जन्म जन्मान्तर के कर्म-संस्कार रूपी आवरणों को साफ कर आत्मा को आवरण रहित, परम निर्मल निज रूपता का बोध कराती हुई मोक्ष लाभ कराती है।