अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर। एशिया की सबसे बड़ी मानव निर्मित झील गोबिंदसागर में पानी को चढ़े हुए तीन माह से ज्यादा का समय हो चुका है, लेकिन अभी तक यहां पर किसी भी प्रकार की कोई भी जल क्रीड़ाएं शुरू नहीं की गई है। बिलासपुर में बनाया गया लुहणू वाटर स्पोर्ट्स कांपलेक्स केवल शादी समारोह के लिए ही प्रयोग किया जा रहा है। जबकि यहां पर रखी गई लाखों रुपये की जल क्रीड़ा सामग्री खराब होती जा रही है।
झील का पानी चढ़ते ही यहां पर हर साल विभिन्न तरह की खेल गतिविधियां शुरू हो जाती है। यह भवन अटल बिहारी वाजपेयी पर्वतारोहण संस्थान मनाली के अधीन आता है। इस भवन को यहां पर बनाने व यहां पर स्टाफ रखने का मुख्य उद्देश्य यह था कि यहां पर जल से संबंधित विभिन्न खेलों का आयोजन हो सके व युवा जल क्रीड़ाओं को सीख सकें लेकिन गोबिंद सागर झील में पानी चढ़े हुए तीन माह से ज्यादा का समय हो चुका है व उसके बाद भी कोई गतिविधि झील के अंदर नजर नहीं आती। ऐसे में सवाल है कि जो कर्मचारी व अधिकारी यहां पर रखे हैं, वह क्या केवल शादी समारोह की बुकिंग के लिए रखे गए हैं। जबकि सदर विधायक भी अपने ज्यादातर भाषण में यही कहते हैं कि झील को पर्यटकों की दृष्टि से संवारा जाएगा, यहां पर खेल गतिविधियां शुरू की जाएंगी लेकिन उसके बाद भी विभाग की ओर से पानी चढ़ने के तीन माह बाद कोई भी नाव व पैडल बोट सहित अन्य पानी के उपकरण झील में न उतारना अपने आप में हैरानी करने वाली बात है। झील का पानी अगस्त माह से जनवरी माह तक चढ़ता है। इसी समय के बीच यहां पर खेल गतिविधियों का आयोजन किया जा सकता है लेकिन अब तीन माह बचे हैं, लेकिन इस बार पर्यटक तो दूर स्थानीय लोग भी बोटिंग का लुत्फ नहीं उठा पाए हैं।
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1. इस बारे में पर्वतारोहण संस्थान मनाली के डायरेक्टर अश्वनी कुमार का कहना है कि इस बारे में प्रभारी से बातचीत की जाएगी। स्टाफ की कमी होने के चलते दिक्कतें आई हैं। जल्द ही गतिविधियां शुरू कर दी जाएगी।
2. लुहणू वाटर स्पोर्ट्स कांपलेक्स प्रभारी राकेश वालिया का कहना है कि दो से चार दिनों के भीतर यहां पर बेसिक कैंप का आयोजन किया जाएगा, जिसमें युवाओं को तैराकी के गुर सीखाए जाएंगे।