नियमों को ताक में रख गोबिंद सागर में डाल दिया मछली का बीज
अक्तूबर में मछलियों का बीज डालने का नहीं उचित समय
झील से बाहर निकले मछलियों के मृत बीज ने खोली पोल
खेमराज शर्मा
बिलासपुर। मत्स्य विभाग ने नियमों को ताक में रख कर गोबिंद सागर झील में बीज डाल दिया है, जबकि रेजर वायर में मछलियों का बीज डालने का यह उचित समय नहीं है। इस समय प्रदेश के सभी जलाशयों में मछली पकड़ने के लिए प्रतिबंध हटाया गया है, लेकिन वीरवार को बिलासपुर के लुहणू में मत्स्य विभाग ने सिलवर कॉर्प मछली का बीज डाला है। जिसमें से कई सिलवर कॉर्प मछलियां तो गोबिंद सागर झील में डालते ही मर गईं।
मछलियों का बीज जून और जुलाई में ही डाला जाता है। बीज डालने के दो से ढाई माह तक मछली पकड़ने पर प्रतिबंध रहता है। ऐसे में अक्तूबर माह में डाला गया मछली का बीज कई सवाल पैदा करता है। बीज डालते समय वहां पर मौजूद मछुआरों ने भी इसका विरोध किया था, लेकिन मत्स्य विभाग के अधिकारियों ने किसी की न सुनते हुए मछली का बीज गोबिंद सागर झील में डाल दिया। उससे भी बड़ी दुखद घटना यह रही की बीज डालने के कुछ समय बाद ही मछलियां मरी हुई ऊपर आ गई। इससे लुहणू घाट पर गोबिंद झील के किनारे मछलियों के मरे हुए बीज की भरमार लग गई। तीन से चार क्रेट भरकर मरी हुए मछलियों के बीज के बाहर निकाले गए। लेकिन उसके बाद भी झील किनारे मरी हुई मछलियां बहती रहीं। हालांकि विभाग का कहना था कि वह केवल जिंदा मछलियों के बीज की ही पेमेंट करेगा, लेकिन विभाग ने बिना गिनती किए एक अंदाजे से ही मरे और जीवित बीज का अनुमान लगा कर रिपोर्ट तैयार कर दी। करीब 18000 के करीब सिलवर कॉर्प मछलियों का बीज गोबिंद सागर में डाला गया, जिसमें से तीन हजार से ज्यादा सिलवर कॉर्प मछलियां मर कर गोबिंद सागर किनारे आ गई। ऐसे में बड़ा सवाल है कि बेमौसमी सीजन में मछलियों का बीज क्यों डाला गया और किसके कहने पर डाला गया है।
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तीन से चार फुट गहने पानी में डाला जाता है बीज
जहां मत्स्य विभाग ने सिलवर कॉर्प मछली का बीज गोबिंद सागर झील में डाला, वहां पर पानी महज एक से दो फुट तक था और चारों और गंदगी थी। फिशरमैन को-ऑपरेटिव सोसायटी बिलासपुर के प्रधान रूपलाल ठाकुर का कहना है कि बीज डालने के लिए तीन से चार फीट गहरे पानी की जरूरत होती है और एक प्रक्रिया के अनुसार ही मछली का बीज डाला जाता है, लेकिन विभागीय अधिकारी अपनी मनमर्जी से मरा हुआ मछली का बीज भी डाल देते हैं। इससे झील गंदी हो जाती है।
लखनऊ से आया था सिलवर कॉर्प मछलियों का बीज
मौके पर मौजूद मत्स्य अधिकारियों का कहना था कि सिलवर कॉर्प मछली का बीज लखनऊ से मंगवाया गया है। कुछ मछलियां लंबे सफर के बाद ऑक्सीजन की कमी से मर जाती हैं। विभाग केवल उन्हीं मछलियों का भुगतान करता है, जो बच जाती हैं। मरी हुई मछलियों का पैसा ठेकेदार और फर्म को नहीं दिया जाता।