अमर उजाला ब्यूरो
बरमाणा (बिलासपुर)।
एनटीपीसी कोल बांध क्षेत्र में गांव बरयाही (जमथल) में तेंदुए की मौजूदगी से लोग खौफजदा हैं। यहां कभी भी मादा तेंदुआ बच्चों के साथ रास्तों पर दिख जाती है। इससे शाम के समय गांव को जाने वाले ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अकसर राह चलते लोगों को मादा तेंदुए के गुर्राने की आवाजें सुनाई देती हैं। इससे लोग बुरी तरह से सहमे हुए हैं।
गांव में करीब 100 लोग रहते हैं, और तेंदुए की खौफ से वह एसीसी के खनन एरिया से होकर जाने को मजबूर हैं। हालत यह है कि स्कूली बच्चों को भी यहां से करीब चार से पांच किलोमीटर का अतिरिक्त सफर तय करना पड़ता है। सुनसान रास्ता होने से यहां जंगली जानवरों के हमले का खतरा रहता है। स्थानीय निवासी जीतराम, योगेश, प्रीतम, बलवीर, पवन कुमार, धर्म पाल, सोनू, गीता देवी, निर्मला, भागा देवी और मीना देवी का कहना है कि अब उन्हें बच्चों को भी स्कूल भेजने से डर लगता है। ऐसे में उन्हें अब बच्चों को स्कूल भेजना ही बंद करना पड़ेगा। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि जल्द बरयाही की जनता को इस दहशत से निजात दिलाया जाए। ग्रामीणों ने बताया कि पिछले दिनों भी इसी जगह पर तेंदुए ने एक ग्रामीण पर हमला किया था। गनीमत रही कि किसी तरह शोर मचाकर उसने अपने आप को बचा लिया था। अब लोगों में दिन-रात तेंदुए के हमले का भय बना रहता है।
मादा तेंदुआ ने रोका था वाहन
कुछ दिन पहले मादा तेंदुए ने सड़क पर एक गाड़ी को करीब आधे घंटे तक रोके रखा। ग्रामीण अमरजीत और उसका परिवार एसीसी से गाड़ी में सवार होकर घर जा रहा था कि रास्ते में मादा तेंदुआ बच्चों के साथ सड़क पर दिखी। ऐसे में परिवार गाड़ी में ही बैठ कर मादा तेंदुए के वहां से चले जाने तक का इंतजार किया। अमरजीत के अनुसार वह गुर्राती हुई वहीं घूमती रही। सड़क किनारे जाने पर अमरजीत सिंह ने जैसे ही गाड़ी निकालने का प्रयास किया तो वह फिर गुर्राती हुई सड़क के बीच सामने आ गई। करीब आधे घंटे बाद मादा तेंदुए ने रास्ता छोड़ा, जिसके बाद वह वहां से निकल पाए।