शाहतलाई (बिलासपुर)।
मक्की बिजाई के बाद जिला के कई इलाकों में बारिश न होने से मक्की की फसल सूखने की कगार पर पहुंच चुकी है। मौसम की बेरुखी ऐसी है कि बारिश न होने के कारण क्षेत्र के निचले क्षेत्रों में अभी तक धान की रोपाई नहीं हो पाई है। इस वजह से किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है। बारिश का इंतजार करते-करते थक चुके किसान अब इंद्र देवता को खुश करने के लिए पारंपरिक मान्यताओं का सहारा ले रहे हैं। हालत ऐसी है कि मानसून में देरी के चलते सूखे के कारण जिले में बीजी मक्की की फसल बर्बाद होने की कगार पर पहुंच गई है। जिला के 65 हजार से अधिक परिवार कृषि पर निर्भर है। यहां करीब 32 हजार हेक्टेयर क्षेत्र पर कृषि करके किसान अपने परिवार का पेट पालते हैं। जिला में करीब 70 हजार मीट्रिक टन मक्की और धान करीब 200 मीट्रिक टन पैदावार होती है।
मगर बारिश न होने के कारण अभी तक 25 फीसदी मक्की की फसल बर्बाद हो चुकी है। इ का प्रतिशत दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। उधर धान की पैदावार करने वाले किसानों ने तो धान की रोपाई करने की उम्मीद ही को छोड़ दी है। खेतों को खाली देख कर कई किसानों ने तो पशुचारे की बिजाई शुरू कर दी है। किसान प्रकाश चंद, सोमराज, चंद्र कुमार, केवल राम, मूलराज, सुशील कुमार, परसराम, मस्तराम, शंभू राम, हरिदत्त, अमर चंद, विद्या देवी, मनेंद्र सिंह, शिवपाल, सीताराम, कर्म चंद, जरनैल सिंह, किशोरी लाल और रोशन लाल का कहना है उन्होंने महंगे दामों पर बीज खरीदकर मक्की की बिजाई की है ताकि अधिक से अधिक पैदावार हो सके। मगर बारिश न होने से किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरे साफ दिखाई देने लगी है। 200 बीघा भूमि पर तो धान के स्थान पर पशुचारा बीजा जा रखा है। किसानों का कहना है कि अगर अब भी बारिश हो जाए तो भी धान की रोपाई नहीं हो सकती है। मगर मक्की के नुकसान की भरपाई कुछ हद तक होने की उम्मीद लगाई जा सकती है। जिला के कृषि उपनिदेशक दिलीप सिंह पंथ ने बताया कि जिला में इस समय अपेक्षा से कम बरसात हुई है और बारिश की कमी से हुए नुकसान के आंकड़े जिला भर से इकट्ठे किए जा रहे हैं। इसे प्रदेश सरकार को भेजा जाएगा।