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Bilaspur News: सिस्टम का कचरा घुमारवीं नगर परिषद के 30 साल, सात वार्ड और 100 वादे...नतीजा शून्य

Mon, 19 Jan 2026 11:34 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
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घुमारवीं में खुले में लगे कूड़े के ढेर। संवाद
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ग्राउंड रिपोर्ट: सिस्टम का कचरा
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तिजोरी में बंद है 1 करोड़ का बजट, शहर की सांसों में घुल रही गंदगी की दुर्गंध
जिस मुद्दे पर हर पांच साल में लड़े, जीते जाते हैं चुनाव, वो फाइलों में है दफन
डेढ़ दशक के बाद भी फाइलों से बाहर नहीं निकल पाया शहर का कूड़ा संयंत्र


संजीव शामा
घुमारवीं (बिलासपुर)। नगर परिषद घुमारवीं का गठन वर्ष 1995 में इस उम्मीद के साथ हुआ था कि शहर को आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी, लेकिन तीन दशक बाद हकीकत इसके उलट है। आज यह नगर परिषद खुद कचरा प्रबंधन के ढेर पर लाचार खड़ी नजर आती है। सात वार्ड वाले इस शहर में आज तक कूड़े के निष्पादन की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं हो पाई है। विडंबना देखिए, जिस मुद्दे पर हर पांच साल में चुनाव लड़े और जीते जाते हैं, वह सत्ता की कुर्सी मिलते ही फाइलों में दफन हो जाता है।
हैरानी की बात यह है कि नगर परिषद के पास कूड़ा संयंत्र केंद्र स्थापित करने के लिए 1 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत है। लेकिन यह पैसा पिछले कई सालों से परिषद के खाते में केवल धूल फांक रहा है। इसे प्रशासनिक नाकामी कहें या जनप्रतिनिधियों की इच्छाशक्ति का अभाव। पैसा होने के बावजूद घुमारवीं को एक अदद डंपिंग साइट नसीब नहीं हुई।
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नगर परिषद ने पिछले 17 वर्ष में जमीन चयन के नाम पर केवल खानापूर्ति की है। बजोहा वार्ड में संयंत्र का प्रस्ताव आया, लेकिन स्थानीय विरोध के आगे परिषद ने घुटने टेक दिए। भदशीं गांव में निजी भूमि पर कचरा फेंकना शुरू किया, तो राजनीतिक दबाव ने काम रुकवा दिया। सीर खड्ड और मेला ग्राउंड में पवित्र खड्ड और सार्वजनिक मैदानों को अस्थायी डंपिंग साइट बनाकर पर्यावरण की धज्जियां उड़ाई गईं, जो आज भी जारी है। सबसे बड़ा कारण यह है कि सियासी खींचतान, जनप्रतिनिधियों की आपसी गुटबाजी ने विकास कार्यों को कभी प्राथमिकता नहीं दी। स्थायी समाधान खोजने के बजाय हर बार अस्थायी जगहों पर कूड़ा फेंककर मामले को टाला गया। पिछले 25 वर्ष से परिषद पर काबिज चेहरे केवल चुनाव के वक्त प्लांट का सपना दिखाते हैं। कुर्सी जीतने के बाद सब भूल जाते हैं। सवाल यह नहीं है कि भूमि हस्तांतरण में कितनी देरी हो रही है, सवाल यह है कि 30 साल में प्रशासन और पार्षदों ने कोई ठोस विकल्प क्यों नहीं तलाशा? क्या घुमारवीं की जनता को इसी तरह गंदगी और झूठे वादों के बीच जीने के लिए छोड़ दिया जाएगा? एक करोड़ का बजट और 30 साल का समय किसी भी व्यवस्था को सुधारने के लिए काफी होता है, लेकिन यहां केवल फाइलें दौड़ रही हैं, समाधान कोई नहीं है। संवाद
इनसेट
30 साल पहले भी हम कूड़े की बात कर रहे थे, आज भी वही हाल है। परिषद केवल टैक्स लेना जानती है, सुविधा देना नहीं। - जगतपाल
इनसेट
सीर खड्ड के किनारे कचरा फेंकने से पूरे इलाके में बदबू फैली रहती है। हमारे बच्चों की सेहत का जिम्मेदार कौन है? नेता तो एयर कंडीशनर में बैठते हैं। -विशाल शर्मा
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इनसेट
शहर के मुख्य स्थानों पर गंदगी का ढेर लगा रहता है। बाहर से आने वाले ग्राहक घुमारवीं की कैसी छवि लेकर जाते होंगे? यह शर्मनाक है। -मनोज कुमार
इनसेट
डिजिटल इंडिया में एक कूड़े की फाइल 17 साल से नहीं निपट पा रही। यह प्रशासनिक सुस्ती का सबसे बड़ा उदाहरण है। - फारूक मोहम्मद
कोट
अध्यक्ष का वही पुराना राग
जल्द ही कूड़ा संयंत्र का निर्माण किया जाएगा, जिसके लिए भूमि चयनित कर ली गई है। लेकिन भूमि अभी तक नगर परिषद के नाम हस्तांतरित नहीं हो पाई है। प्रक्रिया जारी है, जैसे ही प्रक्रिया पूरी होगी काम शुरू कर दिया जाएगा। -रीता सहगल, अध्यक्ष, नगर परिषद घुमारवीं

घुमारवीं में खुले में लगे कूड़े के ढेर। संवाद

घुमारवीं में खुले में लगे कूड़े के ढेर। संवाद

घुमारवीं में खुले में लगे कूड़े के ढेर। संवाद

घुमारवीं में खुले में लगे कूड़े के ढेर। संवाद

घुमारवीं में खुले में लगे कूड़े के ढेर। संवाद

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