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टनल निर्माण में मजदूरों की जिंदगी से हो रहा खिलवाड़

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स्वारघाट (बिलासपुर)। चंडीगढ़-मनाली हाईवे पर मेहला में रेस्क्यू टनल धंसने के बाद अब कंपनी अपनी खाल बचाने में जुट गई है। कंपनी का दावा है कि रेस्क्यू टनल दो साल से बंद है। क्योंकि टनल पहले धंस चुकी है। ऐसे में कंपनी एक बार फिर से अपनी ही बात में फंसती नजर आ रही है। अगर मान लिया जाए टनल पहले धंस चुकी है और दो साल से बंद है तो इसका सीधा अर्थ यह है कि कंपनी दो साल से मजदूरों की जान से खिलवाड़ कर रही है। अगर रेस्क्यू टनल दो साल से बंद है तो फिर टिहरा टनल की तरह कोई हादसा होता है तो मेन टनल में फंसे मजदूर कैसे रेस्क्यू किए जाएंगे। यह भी एक बड़ा सवाल है। हालांकि सोमवार को कंपनी के अधिकारी मौके पर पहुंचे और मीटिंग कर आगे की रूपरेखा तैयार की।
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उल्लेखनीय है कि कीतरपुर से नैरचौक के लिए फोरलेन का निर्माण किया जा रहा है। इसमें टनलें भी बनाई जा रही हैं। कैंचीमोड़ से मेहला के लिए भी एक टनल बनाई जा रही है। इसकी कुल लंबाई 1800 मीटर है। इसका एक छोर कैंची मोड़ से बन रहा है तो दूसरा मेहला की ओर से। इसी टनल के साथ एक अन्य दूसरी टनल भी बनाई जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य आपदा या टनल धंसने के दौरान रेस्क्यू को जल्द से जल्द पीड़ितों तक पहुंचाना है। इस टनल को हर 300 मीटर के बाद मुख्य टनल के साथ जोड़ा जाना था। लेकिन अब कंपनी के अधिकारी दावा कर रहे हैं कि मेहला की तरफ से मुख्य टनल के साथ बन रही दूसरी टनल का कार्य कंपनी ने रोक दिया है।
मुख्य टनल मेहला की ओर से करीब 500 मीटर तक बन चुकी है। जबकि दूसरी टनल 30 मीटर बाद ही धंस गई है। उसका निर्माण कार्य ठप है। ऐसे में सवाल है कि जो टनल 300 मीटर के बाद मुख्य टनल के साथ जोड़ी जानी थी, वह शुरू ही नहीं हो पाई है। जबकि कैंची मोड़ से बन रही दोनों टनलों का काम एकसाथ चला हुआ है। यहां से टनल करीब 1000 मीटर तक पूरी हो चुकी है। ऐसे में सवाल यह है कि जिस टनल को आपातकाल के समय में प्रयोग किया जाना था, उस टनल को क्यों मुख्य टनल के साथ नहीं बनाया जा रहा है। अगर मुख्य टनल बैठ जाती है तो उसके अंदर फंसने वाले मजदूरों को कैसे बाहर निकाला जाएगा। कायदे से होना तो यह चाहिए था कि दोनों टनलों का कार्य एक साथ सुचारु रूप से चलाया जाना चाहिए था। लेकिन ऐसा न कर कंपनी मजदूरों की जान के साथ खिलवाड़ कर रही है। वहीं कंपनी कंपनी के अधिकारी भी यही बोलते हैं कि टनल का काम दो साल से बंद है। ऐसे में सवाल है कि विकल्प के तौर पर बनाई जा रही दूसरी टनल को क्यों नहीं खोला गया है। मुख्य टनल के बैठ जाने पर उसके अंदर फंसने वाले मजदूरों को कैसे बाहर निकाला जाएगा।
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जबकि दूसरी ओर कंपनी ने कैंची मोड़ की ओर से दोनों टनलों का काम एकसाथ चलाया हुआ है। वैसे ही मैहला की तरफ से भी इन्हें साथ में चलाया जाना था। लेकिन ऐसा नहीं है। जिससे साफ है कि मजदूरों की जान के साथ खिलवाड़ हो रहा है। यह टनल फोरलेन की सबसे लंबी टनल है। इसकी लंबाई 1800 मीटर है। मुख्य टनल के साथ दूसरी टनल को हर 300 मीटर के बाद जोड़ा जाना है। ताकि यातायात या अन्य घटना होती है तो पीड़ितों तक समय रहते पहुंचा जा सके।
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उधर, कंपनी ने एचआर राजकुमार का कहना है कि टनल का काम दो साल से बंद है। तकनीकी कारण से काम रुका हुआ है।
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