अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर। मछली उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार की ओर से जो केंद्र सकार को 34 करोड़ 50 लाख रुपये का प्रोजेक्ट भेजा गया था, उसे स्वीकृति मिल गई है। इस राशि से अब प्रदेश के मछुआरों के लिए आने वाले पांच वर्षों के भीतर 200 से अधिक मकान, 250 के लगभग मछली पकड़ने के लिए किश्तियां व जाल मुहैया करवाए जाएंगे। यह खुलासा पंचायती राज, पशुपालन व मत्स्य पालन मंत्री विरेंद्र कंवर ने किया है।
झंडूता के पियुंगलि (कोसरियां) में आयोजित एक दिवसीय मछुआरा सम्मेलन में पहुंचे मंत्री ने कहा कि मछली पालन में बढ़ोतरी के लिए इस वर्ष शतप्रतिशत 90 एमएम का सिल्वर कॉर्प बीज डाला गया है। पहले यह बीज बाहरी राज्यों से मंगवाया जाता था जो कि यहां के वातावरण के अनुकूल नहीं होता, जिसके कारण अधिकांश बीज नष्ट हो जाता था लेकिन अब इस बीज को स्थानीय स्तर पर बनाने की योजनाओं पर कार्य किया जा रहा है ताकि अधिक से अधिक मछुआरों को लाभान्वित किया जा सके।
प्रदेश में लगभग 160 करोड़ रुपये की वार्षिक आय मत्स्य पालन से हो रही है जिसे 300 करोड़ रुपये तक बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। प्रदेश में ट्राउट मछली के उत्पादन से 20 करोड़ रुपये से भी ज्यादा आय प्राप्त हो रही है। इस उत्पादन को और अधिक बढ़ाने के लिए 200 से भी अधिक ट्राउट इकाइयां प्रदेश में लगाने का प्रावधान किया जा रहा है। प्रदेश में सहकारिता के माध्यम से मछली क्षेत्र में 4 मछली प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित की जाएंगी।
इन प्रसंस्करण इकाइयों के माध्यम से जहां तैयार उत्पादों को बेहतर दाम मिल सकेंगे वहीं स्वरोजगार के भी अधिक से अधिक अवसर मिलेंगे। प्रदेश सरकार द्वारा री-साइक्लिंग असेसमेंट सिस्टर योजना के माध्यम से कम पानी में मछली उत्पादन संभव हो इसके लिए व्यवस्था करवाई जा रही है। प्रथम चरण में इस योजना के तहत नालागढ़ यूनिट स्थापित किया जा रहा है। पौंग डैम की तर्ज पर गोबिंद सागर में भी सिल्वर कॉर्प की एक समान प्रणाली को लागू करने की भी व्यवस्था की जा रही है।