बिलासपुर।
बिलासपुर में शिक्षा विभाग के अधिकारियों को ये भीी नहीं पता कि उनके कितने अध्यापक चुनावी ड्यूटी पर हैं। ऐसे में अधिकारी कैसे शिक्षा के स्तर को बढ़ा पाएंगे। कैसे बच्चों का भविष्य सुधार पाएंगे। ऐसे में सवाल यह है कि विभाग के पास क्यों अपने अध्यापकों की सूची नहीं है जो चुनावी ड्यूटी पर हैं।
जिला बिलासपुर में इस वक्त 105 राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल और 49 हाई स्कूल हैं। इनमें 28385 बच्चे पढ़ते हैं। इनमें से छठीं से लेकर बारहवीं तक के 14,351 छात्र और 14,034 छात्राएं हैं। फरवरी 2017 की रिपोर्ट के मुताबिक उस समय एक प्रधानाचार्य, 37 लेक्चरों, 14 डीपीई, अधीक्षक ग्रेड-दो के 26, सीनियर असिस्टेंट के 26, क्लर्क के 100 सहित चतुर्थ श्रेणी के 115 कर्मियों की रिक्तियां चल रही थी। ऐसे में विभाग के आंकड़े दर्शाते हैं कि पहले ही शिक्षा विभाग अध्यापकों और कर्मियों की कमी से जूझ रहा है।
जिला में कई प्राइमरी स्कूल ऐसे भी हैं, जहां पर केवल एक ही अध्यापक तीन से चार कक्षाओं को पढ़ा रहा है। इससे शिक्षा का स्तर भी गिरता जा रहा है। लेकिन इसके बावजूद चुनावों के समय कितने अध्यापक चुनावी ड्यूटी पर हैं, शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों को ही पता नहीं। ऐसे में कैसे शिक्षा के बेहतर दावों को पूरा करने वायदों को पूरा किया जा सकता है।
इस बारे में उच्च शिक्षा उप-निदेशक अमर सिंह ठाकुर का कहना है कि अध्यापकों की चुनावी ड्यूटी में तैनात अध्यापकों की सूची उनके पास नहीं है। इस बारे में स्कूलों के मुखियों से सूची मांगी जा रही है। जल्द ही उनके पास सूची आ जाएगी।