टीननुमा शेड में पढ़ाई करने को मजबूर बच्चे
स्मार्ट कक्षाओं के दावों की खुल रही पोल, बजट और जमीन उपलब्ध होने पर नहीं बना स्कूल भवन
अमर उजाला ब्यूरो
जामली(बिलासपुर)। एक ओर जहां प्रदेश के सरकारी स्कूलों में स्मार्ट कक्षाओं में पढ़ाई के दावे किए जा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर जिला में एक ऐसा स्कूल भी है जहां बच्चे टीननुमा शेड में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। जिस कारण अभिभावक बच्चों को दूसरे स्कूलों में ले जा रहे हैं। वर्तमान में स्कूल में बच्चों की संख्या 15 रह गई है। हालांकि स्कूल भवन निर्माण के लिए लाखों की बजट और आधा बीघा जमीन भी उपलब्ध है। लेकिन इसके बाद भी भवन निर्माण नहीं हो पा रहा है।
विभाग के सुस्त रवैये के कारण राजकीय प्राथमिक पाठशाला पडगल के विद्यार्थी टीननुमा शेड में शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हैं। इस स्कूल में बिजली तक नहीं है। जिस कारण गर्मी के मौसम में टीननुमा इन शेड में विद्यार्थियों को बैठना कितना मुश्किल होता होगा। इसका अंदाजा सहजता से लगाया जा सकता है। गर्मियों में जहां टीन ज्यादा गर्म होती है तो सर्दियों में ठंडी, जिस कारण विद्यार्थियों को गर्मी व सर्दी में अपनी पढ़ाई पूरी करनी पड़ रही है।
जानकारी के अनुसार नौणी पंचायत के तहत आने वाले राजकीय प्राथमिक पाठशाला पडगल का भवन कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन की जद में आ गया था तथा संबंधित कंपनी ने स्कूल के भवन को गिरा दिया था। संबंधित कंपनी ने शिक्षा विभाग को गिराए गए स्कूल भवन की एवज में 19 लाख 63 हजार की राशि भी जारी कर दी है। इतना ही नहीं स्कूल भवन बनाने के लिए गांव के ही एक व्यक्ति ने 10 बिस्वा जमीन भी दान कर दी है। बावजूद इसके अभी तक स्कूल का भवन नहीं बन पाया।
इस स्कूल का भवन गिराए जाने के बाद यहां पर शिक्षारत विद्यार्थियों को शिक्षा उपलब्ध करवाने के लिए टीननुमा शेड बनाए गए हैं। जिसमें 2 कमरे व एक रसोईघर शामिल है। विद्यार्थी इन्हीं टीननुमा शेडों में नवंबर 2016 से शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हैं। इस स्कूल में मौजूदा समय 15 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं जबकि 2 अध्यापक कार्यरत हैं। बताया जा रहा है कि अभी तक विभाग इस स्कूल का भवन बनाने के लिए किसी एजेंसी का नाम ही फाइनल नहीं कर पाया है। इधर, उपायुक्त विवेक भाटिया ने कहा कि स्कूल भवन निर्माण क्यों नहीं हो पाया है। इस संबंध में शिक्षा विभाग से जवाब तलब किया जाएगा।