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किस की निगरानी में काटे गए पेड़ 10 दिन में दें रिकार्ड

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किस की निगरानी में काटे गए पेड़ 10 दिन में दें रिकार्ड
अरण्यपाल ने इस संबंध में डीएफओ से मांगी रिपोर्ट
समिति का दावा अलाइनमेंट से हट कर काटे गए थे पेड़
अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन निर्माण के दौरान काटे गए करीब 12 हजार पेड़ किस नियम और किस अधिकारी की देखरेख में काटे गए हैं इस संबंध में अरण्यपाल ने पूरी रिपोर्ट मांगी है। इस बारे में डीएफओ को दस दिन के अंदर उन अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम बताने को कहा गया है जिनकी निगरानी में कटान हुआ है।
उल्लेखनीय है कि कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन निर्माण में पेड़ कटान का वन विभाग के पास कोई जानकारी नहीं थी। सूचना के अधिकार में पूछे गए सवाल पर वन विभाग की ओर से डीएफओ सरोज भाई पटेल ने कहा था कि इस संबंध में उनके कार्यालय में कोई सूचना नहीं है।
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फोरलेन समिति ने पूछा था कि वन विभाग ने वन भूमि के अलावा निजी भूमि, सरकारी भूमि में जो पेड़ काटे गए जो वन निगम को दोहन के लिए सौंपे गए थे, उन पेड़ों के कटान के कार्य के दौरान वन विभाग के किस-किस स्तर के किन अधिकारियों द्वारा मौका निरीक्षण किया जाना था। उन अधिकारियों ने पेड़ों के इस कटान के दौरान किस-किस क्षेत्र का लॉट का में कब-कब निरीक्षण किया जिसकी पूरी जानकारी मांगी गई थी लेकिन वन विभाग ने इस संबंध में अपनी पत्र संख्या नंबर/आरटीआई/ 9863 दिनांक 7.01.2019 को बताया कि जो सूचना मांगी गई है वह इस कार्यालय में मौजूद नहीं है। इसके बाद फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति ने अरण्यपाल को शिकायत दी थी। इस पर अरण्यपाल बिलासपुर आरएस पटियाल ने डीएफओ से रिपोर्ट मांगी है।
इनसेट...
पेड़ नियमों को ताक पर रखकर काटे गए
समिति के उपप्रधान राकेश कुमार, चिंता देवी, सीता राम, जगदीश, सुभाष चंद, कोषाध्यक्ष श्रवण कुमार, मुख्य सलाहकार लेखराम और महासचिव मदन लाल शर्मा का कहना है कि पेड़ नियमों को ताक पर रख काटे गए हैं क्योंकि सेंटर लाइन और भू-अधिग्रहण प्लान से हट कर पेड़ काटे गए हैं। इससे वन विभाग को करोड़ों का नुकसान हुआ है। जबकि पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचा है। समिति का दावा है कि निर्माण के दौरान करीब 26 हजार पेड़ चिह्नित किए गए थे और कटने 12 हजार थे।
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इनसेट...
निरीक्षण के बाद पेड़ कटान होना था
वन विभाग के अरण्यपाल कार्यालय से मिली सूचना में जबकि साफ किया गया है कि पेड़ कटान का 25 फीसदी निरीक्षण रेंज अधिकारी करेंगे। एसीएफ 15 फीसदी, डीएफओ 10 फीसदी और अरण्यपाल 2 फीसदी मौका निरीक्षण करेंगे। इनके निरीक्षण के बाद पेड़ कटान होना था लेकिन ऐसा नहीं हो पाया है।
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