बिलासपुर। भाखड़ा विस्थापितों के शहर में गृह लगाने के विरोध में बिलासपुर नप के उपाध्यक्ष कमलेंद्र कश्यप ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। उनका कहना है कि एक ओर तो विस्थापितों को अपने आशियाने टूटने का डर सता रहा है, वहीं दूसरी ओर नगर परिषद बिलासपुर भाखड़ा विस्थापितों के हितों को दरकिनार करते हुए उन पर जबरदस्ती हाउस टैक्स थोप रही है। जबकि सुविधाओं के नाम पर कुछ भी नहीं है।
बिलासपुर परिधिगृह में पत्रकारवार्ता करते हुए उन्होंने ऐलान किया कि यदि गृह कर के मुद्दे पर उन्हें नगर परिषद उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा भी देना पड़ा तो वह पीछे नहीं हटेंगे। कमलेंद्र ने कहा कि गृह कर भाखड़ा विस्थापितों पर थोपे जाने के मुद्दे पर उन्होंने नगर परिषद बिलासपुर की आपात बैठक बुलाने का नोटिस दिया है ताकि यह चर्चा हो सके कि भाखड़ा विस्थापितों पर हाउस टैक्स क्यों लगाया जा रहा है? इस नोटिस को दिए 5 दिन हो चुके हैं, लेकिन नगर परिषद ने इसका कोई जवाब नहीं दिया है। बिलासपुर में गृहकर लगाने के नोटिस लोगों को उस समय दिए जा रहे हैं जब भाखड़ा विस्थापित पहले से ही दहशत में हैं। यह दहशत उनके मकानों को उच्च न्यायालय के आदेशों के बाद तोड़े जाने की चल रही प्रक्रिया से पैदा हुई है। ऐसे में भाखड़ा विस्थापित बेहद मानसिक दबाव में हैं।
कमलेंद्र ने कहा कि हाउस टैक्स या किसी अन्य टैक्स का विरोध नहीं है, लेकिन भाखड़ा विस्थापितों को उजाड़ने के बाद उनके पुनर्वास को तय मापदंडों के अनुसार नहीं किया गया। भाखड़ा विस्थापित आज भी मूलभूत सुविधाओं को तरस रहे हैं। कई भाखड़ा विस्थापितों का तो विस्थापन के 60 वर्ष बाद भी पुनर्वास नहीं हो पाया है। ऐसे में उन पर टैक्स थोप देना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि भाखड़ा विस्थापितों की समस्याएं हल होनी चाहिए, उन पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। लिहाजा सांसदों को भी इस संवेदनशील मुद्दे पर जवाबदेह होना चाहिए।