बिलासपुर।
भाखड़ा विस्थापितों के मामले को लेकर प्रदेश उच्च न्यायालय राज्य सरकार को दो माह की अवधि में अवैध कब्जों को नियमित करने के लिए स्थायी नीति बनाए जाने के लिए आदेश पारित किए हैं। प्रदेश उच्च न्यायालय के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश ने यह आदेश बिलासपुर बचाओ संघर्ष समिति की ओर से नूर बीबी व अन्यों की दायर याचिका की सुनवाई करते हुए दिए हैं। इन आदेशों के पारित होने के साथ ही भाखड़ा विस्थापितों को सता रहा कब्जे हटाने का भय फिलहाल टल गया है।
बिलासपुर बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष तरूण टाडू ने मंगलवार ने बताया कि 22 मार्च को समिति की ओर से अवैध कब्जों में राहत दिए जाने को लेकर एक याचिका प्रदेश उच्च न्यायालय में दायर की थी। यह केस नूर बीबी व अन्य बनाम स्टेट ऑफ एचपी आदर्श था। इसकी पहली पेशी 23 मार्च को हुई थी, जबकि दूसरी पेशी मंगलवार को उच्च न्यायालय में थी।
इसके तहत याचिका पर सुनवाई करते हुए कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश संजय करोल ने राज्य सरकार को आदेश दिए कि विस्थापितों के अवैध कब्जों को लेकर दो माह की अवधि में पॉलिसी बनाई जाए। अब सरकार विस्थापितों के अवैध कब्जों को लेकर पॉलिसी बनाएगी, जिसके आधार पर ही आगामी कार्यवाही होगी। कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश के आदेशों के बाद 345 लोगों पर लटकी अवैध कब्जे हटाने की तलवार फिलहाल हट गई है।
उन्होंने बताया कि बिलासपुर के भाखड़ा विस्थापितों ने देश को रोशन करने की खातिर अपना घर-बार सबकुछ कुर्बान किया है। इसके बदले नए शहर में यहां-वहां प्लॉट देकर उनका बसाव किया गया। हालांकि ज्यादातर ऐसे विस्थापित हैं जिन्होंने जलमग्न शहर में बीघों के हिसाब से जमीन छोड़ी है, लेकिन उनका उचित तरीके से पुनर्वास नहीं हुआ। विस्थापितों को परिवार बढ़ने पर मजबूरी में घर के आसपास कुछ दायरे में कब्जे करने पड़े।
विडंबना यह है कि सालों से विस्थापितों पर अवैध कब्जों के खिलाफ कार्रवाई की तलवार लटकी हुई है। टाडू ने बताया कि एक मामला सिविल अपील में हाईकोर्ट में गया जिसके तहत उस ओर से अवैध कब्जे हटाने के लिए प्रशासन को आदेश जारी हुए। इसके बाद प्रशासन ने नोटिस जारी किए। इसके खिलाफ विस्थापित समिति की ओर से याचिका दायर की गई थी।
उल्लेखनीय है कि पूर्व में एक मामले की सुनवाई करते प्रदेश उच्च न्यायालय की ओर से बिलासपुर शहर के अवैध कब्जों को हटाने के लिए जिला प्रशासन को आदेश जारी हुए थे। इसके बाद प्रशासन की ओर से नगर परिषद के माध्यम से अवैध कब्जों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई। इसके तहत 345 लोगों को नोटिस जारी हुए हैं। इसके बाद विस्थापितों पर अवैध कब्जे हटाने की तलवार लटकी है।
अब 3 अप्रैल को प्रदेश उच्च न्यायालय में पेशी लगी है। मगर संघर्ष समिति की याचिका पर मंगलवार को सुनवाई में कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश के सरकार को जारी हुए ताजा आदेशों के बाद खतरा फिलहाल टल गया है।
हाईकोर्ट के फैसले को सराहा
इस फैसले बिलासपुर के शहरवासी गदगद हैं। समिति के अध्यक्ष तरूण टाडू के साथ ही अधिवक्ता दौलतराम शर्मा, क्रांति कुमार, सुनील गुप्ता, कमलेंद्र कश्यप, अनिरूद्ध, सुरेंद्र गुप्ता, विनय शंकर, दीपक, अजय, सुरेंद्रपाल, राकेश, श्यामलाल, अमित गुप्ता और लोकेश सहित अन्य शहर के बाशिंदों ने इस फैसले का स्वागत किया है।