अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर।
बिलासपुर के वरिष्ठ नागरिक एवं व्यवसायी इंद्रेश शर्मा (65) ने रूढ़ीवादी परंपराओं को दरकिनार करते हुए पीजीआई चंडीगढ़ को देहदान करने का फैसला लिया है। उनकी मृत्यु के बाद शरीर पीजीआई संस्थान में शोध के लिए रखा जाएगा, जहां डॉक्टर कई जानलेवा बीमारियों से बचाव और अन्य कार्यों के शोध के लिए प्रयोग करेंगे।
बिलासपुर में पत्रकारों को संबोधित करते हुए इंद्रेश शर्मा ने बताया कि उन्होंने इस कार्य को पूरा करने के लिए सभी शासनिक औपचारिकताओं को पूरा कर लिया है। इंद्रेश ने बताया कि उनके मन में यह बात कई सालों से थी। मगर यह बात सिर्फ उनके मन को भयभीत करती रहती थी कि यह करूं या नही, यदि करूं तो कैसे ? एक समय ऐसा आया जब उन्होंने यह बात अपने परिवार के समक्ष रखी, लेकिन घर के हालात ऐसे हो गए कि उन्हें ऐसा करने में उनके परिवार वालों ने मना कर दिया। लगातार कोशिशों के बाद वे अपने परिवार को मनाने में सफल रहे। उल्लेखनीय है कि कुछ महीने पूर्व इंद्रेश शर्मा के बड़े पुत्र जालंधर के समीप एक सड़क हादसे में अपने प्राण गंवा दिए थे। इंद्रेश शर्मा ने बताया कि बेटे ऋषभ की प्रेरणा भी उन्हें इस कदम को उठाने पर कारगर साबित हुई है। उनके बेटे ऋषभ शर्मा ने चंडीगढ़ पीजीआई में जाकर देह-दान की औपचारिकताएं पूरी की और उन्हें पीजीआई अस्पताल की तरफ से एक डोनर कार्ड भी उपलब्ध करवाया गया। जो उन्हें हर समय जेब में रखने के निर्देश दिए गए हैं। मृत्यु के बाद जिस शरीर को जलाना हो उसे अगर पीजीआई जैसे स्वास्थ्य संस्थान को शोध कार्य के लिए दान कर दिया जाए, तो डाक्टरों की भावी पीढ़ी उस पर शोध करेगी। उन्होंने बताया कि उनके लिए यह सब करना आसान नहीं था। मगर जब उनके परिवार वालों से सहमति मिली तो उन्होंने चैन की सांस ली। यह उनके लिए सबसे सुकून प्रदान करने वाला पल था, जिसे में जीवन भर भूला नहीं सकते। इसके अलावा उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया है कि जो भी व्यक्ति देह-दान करता है, उसे मृत्यु के बाद उसकी देह संबंधित अस्पताल तक पहुंचाने की व्यवस्था सरकार को करनी चाहिए। ताकि लोग इस पुनीत कार्य केे लिए आगे सके।