अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर। बिलासपुर में प्रकृति के सौंदर्य की कद्र भले ही यहां के हुकमरानों को न हो, लेकिन यहां के युवाओं ने प्राचीन एवं ऐतिहासिक बंदला धार को अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर शिद्दत से उकेर दिया है। यहां हाल ही में राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर के पैराग्लाइडरों के एसआईवी कोर्स के संपन्न होने के साथ ही बिलासपुर का नाम रोशन हुआ है।
इस शिविर में महाराष्ट्र से मंत्रा पैराग्लाइडिंग स्कूल और हिमाचल के करीब 12 युवाओं ने भाग लिया। इस शिविर के आयोजन की खास बात यह रही कि चार दिवसीय शिविर के दौरान सभी प्रतिभागियों ने विलेज टूरिज्म के तहत बंदला के गांवों में स्टे किया। प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 15 सौ रुपये के हिसाब से ग्रामीणों को आमदन हुई। ग्रामीणों की ओर से बनाए गए खाने के साथ-साथ सुबह के समय चूल्हे पर गर्म हुए पानी के स्नान आदि का सभी प्रतिभागियों ने खूब लुत्फ उठाया। 11 से 15 तक अक्तूबर तक आयोजित इस शिविर के दौरान सभी पायलटों ने एसआईवी तकनीक की बारीकियों को प्रयोगात्मक तौर पर समझा।
गौर हो कि पैराग्लाइडिंग में एसआईवी तकनीक का प्रयोग पैराग्लाइडिंग के दौरान किसी भी प्रकार की अनहोनी या आपातकाल के समय पैराग्लाइडर को किस तरह से सुरक्षित लैंड करवाया जाए के बारे में बताया जाता है।
उड़ान के दौरान यदि पायलट को हवा में किसी प्रकार की परेशानी होती है तो वह किस तरह से उन कठिन परिस्थितियों पर काबू पाकर स्वयं को सुरक्षित रखेगा। 12 प्रशिक्षुओं को यह प्रशिक्षण इंस्ट्रक्टर पायलट तानाजी ताकेवे व टीम रमेश, प्रतीक, हरीश ने दिया। तानाजी ताकेवे पूरे देश के एक मात्र ऐसे पायलट हैं जिन्होंने पैराग्लाइडिंग में इनफिनिटी प्रक्रिया को शानदार एवं सफल तरीके से पूर्ण किया।
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