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एनजीटी की रोक के बाद भी नदियों में फेंका जा रहा मलबा

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जिला कुल्लू के लेफ्ट बैंक में ब्यास नदी में डाला जा रहा मलबा फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला
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बिलासपुर।
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किरतपुर-मनाली फोरलेन निर्माण में नियमों की अवहेलना कर अवैध डंपिंग की जा रही है। एनजीटी की रोक के बावजूद फोरलेन निर्माण में जुटी कंपनी सतलुज और ब्यास नदी में भी मलबा फेंक रही है। किरतपुर से बिलासपुर तक करीब 70 नदी-नालों में अवैध डंपिंग की गई है। मत्स्य विभाग की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। वहीं कुल्लू जिले में भी करीब 25 साइटों पर अवैध डंपिंग की गई है। इसमें ब्यास नदी में भी मलबा फेंका गया है। वन विभाग के डीएफओ ने नियमों की अवहेलना पर कंपनी पर 23 लाख का जुर्माना लगाया है। साथ ही मौके से मलबा हटाने के भी निर्देश दिए हैं। अवैध डंपिंग को लेकर फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति ने एनजीटी दिल्ली में केस दर्ज कर रखा है। 26 अप्रैल को फैसला आना प्रस्तावित है। मंडी, कुल्लू और बिलासपुर जिले के सरकारी विभागों के अनुसार करीब 150 स्थानों पर अवैध डंपिंग की गई है। पर्यावरण संरक्षण के नियमों की भी अवहेलना हुई है।
एनजीटी ने सतलुज और ब्यास नदी में मलबा डालने पर पूर्ण रूप से रोक लगा रखी है। फिर भी फोरलेन निर्माण कर रही निजी कंपनी मलबा नदियों में गिरा रही है। बिलासपुर जिले में 70 छोटी बड़ी नदी नाले जिसमें गोबिंद सागर भी शामिल है, में अवैध रूप से डपिंग की जा रही है। इसके अलावा सुंदरनगर में आस पास करीब दस किमी के क्षेत्र में नाले में मलबा फेंका गया है।
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150 स्थानों पर की गई अवैध डंपिंग : मदन लाल
फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के महासचिव मदन लाल शर्मा ने बताया कि बिलासपुर, मंडी और कुल्लू जिले के सरकारी कार्यालयों से मिली जानकारी के अनुसार करीब 150 स्थानों पर अवैध डंपिंग हो रही है। इन सभी दस्तावेज को एनटीजी में 26 अप्रैल से पहले साक्ष्य के रूप में पेश किया जाएगा।
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